आसन व एलोपैथी से रोगों का इलाज योग ओपीडी

योग शरीर को निरोग बनाता है व एलोपैथी में दवाइयों से रोगों का निदान होता है। इन दोनों पद्धतियों को मिलाकर बना है योग...

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jul 2018, 05:23 AM IST

योग शरीर को निरोग बनाता है व एलोपैथी में दवाइयों से रोगों का निदान होता है। इन दोनों पद्धतियों को मिलाकर बना है योग ओपीडी। हाल ही जयपुर के एसएमएस अस्पताल में प्रदेश की पहली योग ओपीडी का शुभारंभ किया गया है। इसके तहत मरीजों को योगासनों और एलोपैथी उपचार के तालमेल से स्वस्थ किया जाना है।

इस तरह से होता है इलाज

1. दो तरह से आते मरीज : इसमें दो तरह से मरीज आते हैं। पहला, दूसरे विभागों से रेफर ऐसे मरीज जिनमें दवाइयों के साथ योग की मदद से बीमारी में सुधार किया जा सकता है। ऐसे में संबंधित डॉक्टर मरीज की स्थिति देखने के बाद उसे योग ओपीडी में रेफर करते हैं। दूसरा, जो मरीज (माइग्रेन, डिप्रेशन, बैकपेन) सीधे अपनी मर्जी से योग ओपीडी में आते हैं। ऐसे मरीजों को डॉक्टर बीमारी के अनुसार संबंधित विभाग से कंसल्ट कर जरूरी टैस्ट करवाने की सलाह देते हैं। जो यहां आसानी से उपलब्ध है।

२. टैस्ट : दूसरे विभाग से आए मरीज की अवस्था और टैस्ट रिपोर्ट के आधार पर ट्रीटमेंट यानी योगासन तय किए जाते हैं। वहीं सीधे योग ओपीडी में आने वाले मरीजों को रोगों से जुड़े टैस्ट (ब्लड टैस्ट-सामान्य मरीज, पल्मोनरी फंक्शन टैस्ट-अस्थमा, रीनल फंक्शन टैस्ट-किडनी, इलेक्ट्रोएंसिफेलोग्राम- ब्रेन, इलेक्ट्रोमायोग्राम- मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी) कराने के बाद रिपोर्ट देखकर व वजन आदि की जानकारी के बाद योगासन कराए जाते हैं।

३. योगासन : मर्ज व गंभीरता के अनुसार योगासन व क्रियाएं कराते हैं। मरीज को सामान्य ओपीडी (सुबह ८- दोपहर २ बजे) में बुलाकर २०-२५ मिनट योग आसन करवाकर घर पर दिन में २ बार (सुबह और शाम) दोहराने की सलाह देते हैं। सुबह खाली पेट व भोजन के ६ घंटे बाद योग करना बताते हैं। ऐसे मरीज जिन्हें सुबह दवा लेनी जरूरी है वे हल्का नाश्ता कर योग कर सकते हैं। इस दौरान मरीज का एलोपैथी उपचार जारी रहता है।

राहत की शुरूआत

केस-१

मल्टीपल मायलोमा का एक ८७ वर्षीय मरीज रेफर होकर आया। उसे रोग से जुड़ा मानसिक तनाव ज्यादा था। उसे योगिक क्रियाएं, ध्यान व प्राणायाम २०-२५ मिनट के लिए कराकर एक हफ्ते के लिए घर पर दोहराने के लिए कहा। फॉलो-अप में कैंसर के दुष्प्रभाव व तनाव कम थे।

केस-२

पिछले ७-८ माह से माइग्रेन से पीडि़त ३५ वर्षीय मरीज आया। उसे माह में ५-६ बार अटैक आते थे। दर्द से राहत के लिए वह कई दर्द निवारक दवा ले चुका था। स्थायी इलाज न मिलने पर योग के लिए वह यहां आए। एक हफ्ते के फॉलोअप के बाद उसे कोई अटैक नहीं आया।

अधिकांश मरीज तनाव व कमरदर्द के

योग ओपीडी में तनाव, अस्थमा, बैकपेन के मरीज ज्यादा आए हैं। यहां सायकोसोमैटिक रोग (अवसाद, अनिद्रा, हाई बीपी, हृदय रोग) व गदनदर्द, हार्मोन और स्नायुतंत्र से जुड़े रोगों का इलाज भी होता है।

* कमरदर्द (बैक पेन): सेतुबंधासन, मेरुदंड क्रियाएं, भुजंगासन, शलभासन, प्राणायाम और मेडिटेशन फायदेमंद है।
* माइग्रेन: गर्दन से जुड़ी योगिक क्रियाएं, प्राणायाम, मेडिटेशन और कायोत्सर्ग।
* अस्थमा: प्राणायाम, कपालभाति क्रिया करने की सलाह देते हैं।
* अवसाद व तनाव: दीर्घ श्वांस प्रेक्षा, प्राणायाम और मेडिटेशन कराते हैं।
* डायबिटीज: वक्रासन, अद्र्धमत्सेन्द्रासन उड्डियान बंध, कपालभाति, मंडूकासन।
* अनिद्रा: कायोत्सर्ग या शवासन।

मुकेश शर्मा Reporting
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