शौक ने बनाया वर्ल्ड चैम्पियन: 68 साल की दादी को था चाकू-छूरी चलाने का शौक, प्रतियोगिता जीतकर बन गई वर्ल्ड चैम्पियन

68वर्षीय गेलिना चूविना ( Galina Chuvina)के कारनामे देख आप भी हो जाएंगे हैरान

घर की चाकू-छूरी को निशानेबाजी के लिए उपयोग कर जीती कई प्रतियोगिताएं

By: Pratibha Tripathi

Updated: 28 Oct 2020, 02:59 PM IST

नई दिल्ली। आज आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जिसने उम्र के उस पड़ाव में शोहरत की बुलंदियों को छुआ है जब महिलाएं पोते पोतियों के साथ समय बिताती हैं। लेकिन रसिया के छोटे से कस्बे में रहने वाली 68 वर्षीय गेलिना चूविना (
Galina Chuvina Knife Thrower )ने वो कारनामा कर दिखाया है जिसे सुन कर हर कोई हैरान रह जाता है। घर की चाकू-छूरी को निशानेबाजी के लिए उपयोग कर इन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया है जिसकी चाहत में ज़्यादातर महिलाएं पूरी ज़िंदगी निकाल देती हैं। गेलिना चाकू-छूरी की निशाना बाजी प्रतियोगिता में आठ बार चैम्पियन रह चुकी हैं। वे नेशनल, यूरोपियन और वर्ल्ड लेवल की चैम्पियनशिप का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं।

2007 में टैलेंट को पहचाना

गेलिना पहले घर पर ही चाकू से निशाना लगाया करती थीं लेकिन साल 2007 में उन्हें लगा कि वे चाकू से निशाना लगाने में माहिर हो सकती हैं। ये वो दौर था जब वे एक लोकल पूल में जॉब करती थीं। उस समय एक दिन उनके नज़दीक से दो लोग गुजरे ये दोनों नाइफ थ्रोइंग क्लब खोलना चाहते थे। गेलिना ने उनकी बात को सुन कर उनसे बात की, और इसके बाद गेलिना पहली प्रतिभागी बनी जिसने उस क्लब में सबसे पहले रजिस्ट्रेशन कराया।

इसके बाद गेलिना चाकू से निशाना लगाने में जुट गईं, लगभग डेढ़ महीने की कठिन ट्रेनिंग के बाद उनके ही शहर में चाकू से निशाना लगाने की प्रतियोगिता हुई जिसमें 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें ज्यादातर आर्मी के लोग थे। पर गेलिना की मेहनत रंग लाई और वे पहले स्थान पर आ खड़ी हुईं।

'बाबा गाल्या' पड़ा नाम

नेशनल चैंपियनशिप का खिताब जीतने के 1 साल बाद यानी साल 2008 में गेलिना ने वर्ल्ड नाइफ थ्रोइंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया जहां उनका मुकाबला 36 वर्षीय दुनिया के सबसे तेज चाकूबाज से हुआ, इस समय गेलीना 68 वर्ष की थीं लेकिन गैलिना ने इस मुकाबले में अपनी जीत का परचम लहराते हुए दुनिया के एक नंबर निशानेबाज को चारों खाने चित कर दिया। उन्हें लोग 'बाबा गाल्या' के नाम से बिलाने लगे। बतादें बाबा का मतलब होता है, दादी और गाल्या का अर्थ है ईश्वर की लहर।

गेलिना के नाम हो चुके हैं 50 मेडल

गेलीना की जीत का सिलसिला जारी है वे 2013 में यूरोपियन नाइफ एंड एक्स थ्रोइंग चैम्पियनशिप का खिताब जीत चुकी हैं। गेलीना के नाम अब तक 50 खिताब हो चुके हैं। दुनिया के कई देशों में नेशनल प्लेयर के तौर पर उनकी पहचान बन चुकी है। लेकिन आज की बिडम्बना यह है कि गेलिना आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं, उनका गुजारा केवल पेंशन से हो रहा है। पैसों की कमी से वे दूसरे देशों में चैम्पियनशिप के लिए नहीं जा पाती हैं। स्थिति यह है कि पेंशन के 16 हजार रुपए से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।

Pratibha Tripathi
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