इस शख्स ने एक लुप्त होती प्र​जाति को बचाने के लिए ठुकरा दिए 20 लाख

असम में पाए जाने वाले टोके गेको की लुप्त हो रही प्रजाति को बचाने के लिए एक वन्यजीव कार्यकर्ता जयंत के दास ने हाल ही एक बड़ा कदम उठाया है। इस पूरी घटना को बताते हुए उन्होंने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी.....

By: भूप सिंह

Published: 17 Nov 2020, 04:11 PM IST

असम में पाए जाने वाले टोके गेको की लुप्त हो रही प्रजाति को बचाने के लिए एक वन्यजीव कार्यकर्ता जयंत के दास ने हाल ही एक बड़ा कदम उठाया है। इस पूरी घटना को बताते हुए उन्होंने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी। दरअसल, उन्होंने शिकारियों से बचाने वाली तस्वीर साझा की थी।

 

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था,'सरीसृप को अवैध शिकारियों से लड़ने के बाद उनके चंगुल से छुड़ाया गया। साथ ही उन्होंने ट्वीट कर यह दावा किया है कि शिकारी उन्हें 20 लाख रुपए की घूस दे रहे थे, लेकिन वह उस जगह से भागने में सफल रहे। साथ ही उन्होंने लिखा उन्हें पैसे खोने का कोई पछतावा नहीं है बल्कि एक सरीसृप को बचाने पर गर्व महसूस हो रहा है।'

 

बता दें कि चीन और कोरिया के बाजारों में गेको के दाम बहुत ज्यादा हैं। क्योंकि उनका मानना है कि यह एचआईवी बीमारी ठीक कर सकता है। गेको की एक तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि मेरी हथेली पर सुंदर उंगलियां। अवैध शिकारियों से लड़ने के बाद इस लुप्तप्राय सरीसृप को बचाया। मैंने गेको को जंगल में छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि टोके गेकेा की एक प्रजाति है। इन्हें करीब 14 करोड़ 45 लाख रुपए में खरीदा जाता हैं। ज्यादातर चीन, कोरिया के अरबपतियों द्वारा ये प्राणी खरीदे जाते हैं।

एचआईवी की बीमारी होती है ठीक
लोग कहते है कि इस जानवर की जीभी से बनी दवाई से एचआईवी जैसी बड़ी बीमारी ठीक होती है, जिसका अब तक कोई इलाज नहीं है। बता दें कि गेको एक प्रकार की छिपकली है जो दुनिया भर में गर्म जलवायु में पाई जाती है। ये बड़े पैमाने पर एशिया में पाए जाते हैं और अपने औषधीय मूल्य के लिए जाने जाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि सरीसृप अस्थमा, मधुमेह और त्वचा विकारों को ठीक करता है और अंतरराष्ट्रीय पालतू व्यापार बाजार में भी लोकप्रिय है। पूर्वोत्तर में गेको ट्रेडिंग काफी आम हो गई है, इन्हें अक्सर म्यांमार ले जाया जाता है और फिर वहां से विभिन्न स्थानों पर भेजा जाता है।

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