खेलने—कूदने की उम्र में छह माह की बच्ची को पत्थर से मारकर उतारा मौत के घाट, बिहार में मशहूर है यह सीरियल किलर

खेलने—कूदने की उम्र में छह माह की बच्ची को पत्थर से मारकर उतारा मौत के घाट, बिहार में मशहूर है यह सीरियल किलर

Arijita Sen | Publish: Sep, 12 2018 05:25:27 PM (IST) | Updated: Sep, 12 2018 05:35:38 PM (IST) अजब गजब

हम आपको एक ऐसे सीरियल किलर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि महज़ आठ साल का है और इस उम्र में ही इसने तीन हत्याओं कके वारदातों को अंजाम दे चुका है।

नई दिल्ली। सीरियल किलर को लेकर हम सभी ने कुछ न कुछ किस्से सुने ही है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सीरियल किलर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि महज़ आठ साल का है और इस उम्र में ही इसने तीन हत्याओं के वारदातों को अंजाम दे चुका है।

इसे मिनी सीरियल किलर के नाम से जाना जाता है। इस मिनी सीरियल किलर का नाम अमरजीत सादा है जो कि सा 1998 में बिहार के बेगुसराय में पैदा हुआ।

अमरजीत अपने परिवार के साथ बेगुसराय में स्थित मुसहरी नामक गांव में रहता है। अमरजीत के पिता मजदूरी का काम करते हैं।

हैरान करने वाली बात ये थी कि अमरजीत केवल सिर्फ छोटे बच्‍चों को ही मारता था। यहां तक कि अमरजीत अपनी बहन को भी मौत के घाट उतार डाला।

 

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अमरजीत के माता पिता को जब उसके इस कारनामें के बारे में पता लगा तो उन्होंने अपने बेटे के कर्माे पर पर्दा डालते हुए किसी से कुछ नहीं कहा। पुलिस को अमरजीत के बारे में तब पता चला जब वो तीसरी बार किसी का खून किया। बिहार के बगूसराय का मुसहरी गांव साल 2007 में एक के बाद एक दो मासूम बच्चों की हत्याओं से दहल उठा लेकिन किसी को इस बात की भनक तक नहीं थी कि ऐसा कौन कर रहा है और इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? इसी बीच एक जवान शख्स का खून हो जाता है और मामला पुलिस तक पहुंचती है। छानबीन करने के बाद ये मिनी सीरियल किलर पुलिस के हाथ लगता है।

 

Mini serial killer

अमरजीत से जब इस बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि बच्चों को बर्बर तरीकें से मारने में उसे मज़ा आता है। उसके इस बयान के बाद उसकी मानसिक स्थिति का पता लगाया गया तो मालूम पड़ा कि वो कंडक्‍ट डिसऑर्डर नामक बीमारी से ग्रस्त है।

 

murder

मनोविशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बच्चों को दूसरे को चोट पहुंचाकर खुशी का अनुभव होता है। महज़ आठ साल के होने के कारण अमरजीत को अपने गुनाहों की कोई सज़ा नहीं मिली और उसे हिरासत में लेने के बाद ईलाज के लिए इसे मनोरोगी अस्‍पताल में भर्ती करवा दिया। हालांकि अब वो बाहर है और एक नए नाम के साथ नई जिंदगी जी रहा है।

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