नहीं बढ़ा है पिछले 500 सालों से यहां किराया, साल में देने पढ़ते हैं महज 70 रुपये

नहीं बढ़ा है पिछले 500 सालों से यहां किराया, साल में देने पढ़ते हैं महज 70 रुपये

Navyavesh Navrahi | Publish: Apr, 24 2019 05:39:26 PM (IST) अजब गजब

  • यहां का किराया है सबसे कम
  • यहां रहने के लिए पूरी करनी पड़ती हैं ये शर्तें
  • किराया आपको हैरान कर देगा

नई दिल्ली: आज की महंगाई में घर खरीदना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं है। ऐसे में या तो कोई लोन ( loan ) या किसी और तरीके से घर खरीदना पड़ता है या फिर कई लोग किराए पर रहने को मजबूर हैं। लेकिन इसमें दिक्कत ये है कि लोन की ईएमआई ( EMI ) काफी ज्यादा होती है या फिर किराया हर बार बढ़ता रहता है। वहीं अगर हम आपसे कहें कि एक जगह ऐसी है जहां किराया पिछले 500 साल से बढ़ा ही नहीं है। साथ ही यहां का सलाना किराया है महज 65 से 70 रूपये के बीच, तो आप कहेंगे भई मजाक क्यों कर रहे हों। लेकिन आपको बता दें कि हम कोई मजाक नहीं बल्कि सच में एक जगह ऐसी हैं जहां ऐसा ही है।

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दरअसल, ये जगह है जर्मनी ( Germany ) में। यहां Fuggerei नाम का हाउसिंग कॉम्प्लेक्स ( Housing Complex ) है, जिसकी स्थापना साल 1514 में एक दिग्गज कारोबारी जैकब फगर ने की थी। यहां पिछले 500 सालों से अब तक किराया नहीं बढ़ा है। यहां का सलाना किराया 1 डॉलर यानि लगभग 70 रूपये है। इस सोसाइटी को उस वक्त ऑग्सबर्ग के गरीब लोगों के लिए बनाया गया था। 14वीं शताब्दी में फगर का परिवार कपड़ों का व्यापार करने के लिए जर्मनी पहुंचा था। वो ऑग्सबर्ग के सबसे धनी परिवार के तौर पर थे। इस जगह को देखने के लिए यहां लोग आते हैं, जिनसे एंट्री फीस के तौर पर 300 रुपये लिए जाते हैं।

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फगर के परिवार का सपना था कि लोगों को सस्ते घर मिल सके, जिसके चलते उन्होंने ये काम किया। यहां पिछले 500 साल से कुछ नियम चले आ रहे हैं जिन्हें पूरा करके ही यहां कोई रह सकता है। नियमों के मुताबिक, यहां रहने के लिए व्यक्ति का कैथलिक होना जरूरी है। यहां रात 10 बजे के बाद सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं। हालांकि, अब इसमें थोड़ी छूट दी गई है, जिसके अनुसार देर से आने पर लगभग 39 रुपये के फाइन के साथ एंट्री ली जा सकती है। साथ ही दिन में तीन बार चर्च ( Church ) जाकर प्रार्थना भी करनी होती है। यहां चर्च की मेंटेनेंस और हीटिंग मेंटेनेंस के लिए 1-1 डॉलर लिया जाता है। ऐसे में साल का किराया लगभग 200 रुपये बैठता है।

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