जैसे ही आप मंदिर में रखते हैं कदम अपने आप होने लगती हैं ये सारी चीजें, बाद में होता है एहसास

इससे कई सारी शारीरिक समस्याएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं।

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Published: 07 Jan 2019, 10:20 AM IST

नई दिल्ली। आज प्रतियोगिता के इस दौर में हर कोई आगे बढ़ने की चाह में सुबह से शाम तक व्यस्त रहता है। तमाम प्रयासों के बाद ही सफलता मिलती है। ऐसे में स्टे्रस, थकान, हाई ब्लड प्रेशर जैसी तमाम बीमारियां कम उम्र में ही इंसान को घेर लेती हैं। क्लीनिक में चक्कर लगाने से बॉडी को तो कुछ हद तक राहत पहुंचता है, लेकिन मानसिक शान्ति के लिए अब हर कोई तो वादियों की सैर पर नहीं जा सकता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि हम किसी ऐसी जगह पर रहें जहां पॉजिटिविटी हो और इसके लिए मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल से बढ़कर कुछ और क्या हो सकता है।

 

मंदिर

जैसा कि आप जानते ही हैं कि इन जगहों में सकारात्मक उर्जा बहुत ज्यादा मात्रा में पाई जाती है और ऐसा होने के पीछे वैज्ञानिक कारण है। जब हम पॉजिटिव एनर्जी के संस्पर्श में आते हैं तो बॉडी और ब्रेन दोनों रिलैक्स हो जाते हैं। इससे कई सारी शारीरिक समस्याएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं।

 

नंगे पैर

जब हम किसी धार्मिक जगह पर जाते हैं तो चप्पल बाहर छोड़कर नंगे पैर चलते हैं इससे यहां की पॉजिटिव एनर्जी पैरों के जरिए हमारी बॉडी में प्रवेश करती है। साथ ही साथ नंगे पैर चलने से पैरों में मौजूद प्रेशर प्वाइंट्स पर भी दवाब पड़ता है, जिससे उच्च रक्तचाप काफी हद तक कंट्रोल हो जाता है।

 

मंदिर

इसी तरह जब हम ईश्वर के सामने हाथ जोड़ते हैं या आरती के समय ताली बजाते हैं तो इससे हथेलियों और उंगलियों में पाए जाने वाले प्वॉइंटस पर प्रेशर पड़ता है। इससे बॉडी के कई सारे फंक्शन्स में सुधार आता है। यह इम्युनिटी सिस्टम को भी मजबूत बनाने में सहायक है। एक रिसर्च के अनुसार, जब हम मंदिर का घंटा बजाते हैं, तो लगभग 7 सेकेंड्स तक कानों में उसकी आवाज गूंजती है। इससे बॉडी को रिलैक्स करने वाले 7 प्वाइंट्स एक्टिव हो जाते हैं जो एनर्जी लेवल को बढ़ाने में सहायक है।

 

मंदिर

यहां जिस धुन में आरती या गाने गाए जाते हैं, उनकी धुन या लय का सकारात्मक प्रभाव हमारे दिमाग पर पड़ता है। यहां का शान्त माहौल या शंख की आवाज मानसिक स्थिति में सुधार लाती है। मंदिर में मौजूद कर्पूर और हवन का धुआं बैक्टीरिया को नष्ट करता है। इससे वायरल इंफेक्शन का खतरा टल जाता है।

 

 हवन का धुआं

भौहों के बीच माथे पर तिलक लगाने से हमारे ब्रेन के एक खास हिस्से पर प्रेशर पड़ने से कॉन्सेंट्रेशन लेवल बढ़ता है।

माथे पर तिलक

यानि कि स्ट्रेस, डिप्रेशन और मानसिक थकान को मिटाने के लिए धार्मिक स्थलों पर हर रोज कुछ समय बिताया जा सकता है। इससे हम परमात्मा से जुड़ सकते हैं और अपनी दैनिक समस्याओं से भी निजात पा सकते हैं।

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