6 महीने से पेड़ पर लटका है ये शव, इस आदिवासी इलाके में लोग ऐसे ही मांगते हैं इंसाफ, जानें क्या है पूरा मामला

6 महीने से पेड़ पर लटका है ये शव, इस आदिवासी इलाके में लोग ऐसे ही मांगते हैं इंसाफ, जानें क्या है पूरा मामला

Priya Singh | Publish: Jun, 08 2019 11:56:00 AM (IST) अजब गजब

  • चारपाई पर पड़ा चादर में लिपटा शव मांग रहा इंसाफ
  • चडोतरु नाम की यह परंपरा निभाई जाती है सदियों से

नई दिल्ली। गुजरात ( Gujarat ) के एक गांव टाढ़ी वेदी में पिछले छह महीने से एक शव पेड़ पर लटका हुआ है। एक चारपाई पर चादर में लिपटे शव के लिए लोग इंसाफ मांग रहे हैं। यह शव भातियाभिया गामर का है। गुजरात-राजस्थान बॉर्डर से 2 किलोमीटर दूर साबरकांठा जिले के पोशिना तालुका का यह गांव अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। चडोतरु नाम की इस परंपरा को पीढ़ियों से निभाया जा रहा है। पोशिना, खेड़रहमा, वडाली और विजयनगर के आदिवासी इलाकों में इंसाफ मांगने के लिए शवों को लटकाया जाता है। इस परंपरा के तहत जब किसी व्यक्ति की अप्राकृतिक मौत या हत्या की जाती है तो आरोपियों द्वारा मुआवजे की मांग की जाती है।

मुआवजे के लिए जो पैसे मिलते हैं उन्हें पीड़ित परिवार और समुदाय के नेताओं में बांट दिया जाता है। बता दें कि यह परंपरा डुंगरी गरासिया भील आदिवासियों में प्रचलित है। भील आदिवासी इस परंपरा को क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम ( Criminal justice ) से ज्यादा इस परंपरा पर भरोसा करते हैं। भातियाभिया गामर का यह शव पिछले 6 महीनों से पेड़ पर ऐसे जी इसलिए टंगा हुआ है क्यों कि उसके घरवालों को शक है कि उसकी हत्या की गई है। 22 वर्षीय गामर का शव पोशिना के नजदीक एक पेड़ से लटका मिला था। उसके पिता मेननभाई मान चुके हैं कि उसकी हत्या की गई है।

मेननभाई के मुताबिक, जिस लड़की से वह प्रेम करता था उसी के परिवार वालों ने उसकी हत्या की है। गामर के रिश्तेदारों का कहना है कि शव पर मारपीट के निशान थे। उनका दावा है कि गामर के चेहरे पर किसी भारी चीज से हमला भी हुआ है। साथ उनका यह भी दावा है कि लड़की के परिजनों ने गामर को धमकी भी दी थी कि अगर 'उसने लड़की से मिलना-जुलना नहीं छोड़ा तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।' 15 फीट की लंबाई पर लटके इस शव को बीते 6 महीनों से टांगकर लोग अपना रोज़मर्रा का काम कर रहे हैं। वहीं पुलिस ने हादसे में हुई मौत का केस दर्ज कर लिया है। लेकिन पुलिस से इन गांवालों को कुछ लेना देना नहीं है।

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