हर रोज आप भी करते होंगे माइक्रोवेव का इस्तेमाल, जान लेंगे पीछे की सच्चाई तो आज से ही करेंगे इससे तौबा

हर रोज आप भी करते होंगे माइक्रोवेव का इस्तेमाल, जान लेंगे पीछे की सच्चाई तो आज से ही करेंगे इससे तौबा

Arijita Sen | Publish: Nov, 10 2018 01:40:41 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 01:40:42 PM (IST) अजब गजब

आज हम माइक्रोवेव से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।

नई दिल्ली। आज विज्ञान का जमाना है। लोग नई-नई तकनीकों को इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटते हैं। घर में आधुनिक मशीनों का होना आजकल एक ट्रेंड सा है। इसमें पीछे रहने की कोई गुजांइश नहीं है। इनमें से कुछ चीजें वाकई में हमारे लिए लाभदायक है और इनसे समय की भी काफी हद तक बचत होती है। हालांकि कुछ मशीनें ऐसी भी हैं जिनसे फायदा कम और नुकसान होने की संभावना ज्यादा रहती है। हम यहां माइक्रोवेव ओवेन की बात कर रहे हैं।

 

माइक्रोवेव

माइक्रोवेव में हम लजीज पकवानों को बना सकते हैं, केक इत्यादि को बेक कर सकते हैं, झटपट खाने की सामग्रियों को गर्म कर सकते हैं। इन सारी सुविधाओं के चलते आजकल लगभग हर घरों में इसे देखा जा सकता है, लेकिन आज हम आपको इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।

जब भी हम माइक्रोवेव ओवन में खाना गर्म करते हैं तो उस वक्त इस बात को दिमाग में गांठ बांध लें कि अब हम जो खाएंगे उसकी पौष्टिकता ना के बराबर होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि माइक्रोवेव में पकाए गए भोजन की पौष्टिकता 60 से 90 तक कम हो जाती है। अब आप समझ सकते हैं कि ऐसा खाना शरीर के लिए लाभदायक होगा या नुकसानदेह।

 

माइक्रोवेव

एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया गया कि माइक्रोवेव से हानिकारक इलेक्ट्रो मैगनेट रेडिएशन निकलता है जिसका नकारात्मक प्रभाव गर्भ में पहल रहे शिशु के ब्रेन, हार्ट और लिंब्स पर पड़ता है। इतना ही नहीं पाचन क्रिया पर भी यह किरणें नेगेटिव इम्पैक्ट डालती है।

 

माइक्रोवेव

जब हम काफी लंबे समय तक माइक्रोवेव में पके हुए भोजन का सेवन करते हैं तो इसका सीधा प्रभाव हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है। जिससे हानिकारक बैक्टीरिया और विषाणुओं से लड़ने की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है और शरीर आसानी से बीमारियों की चपेट में आने लगता है।

इलेक्ट्रो मैगनेट रेडिएशन से दूध और दालों में कैंसरकारक एजेंट्स की रचना होती है। जब हम इसका सेवन करते हैं तब बॉडी का लिंफेटिक सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और वह ठीक से कार्य नहीं कर पाता है। फलस्वरुप खून में कैंसर कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है।

माइक्रोवेव

इतना ही नहीं इसका प्रभाव हार्मोन्स पर भी पड़ता है। इससे समय से पहले त्वचा पर झुर्रियां पड़ने लगती है। इसके साथ ही और भी कई नकारात्मक प्रभावों का सामना शरीर को करना पड़ सकता है।

वक्त को बचाने के लिए या कभी-कभार एमरजेंसी की स्थिति में इनका इस्तेमाल करना लाजिमी है, लेकिन इन्ही मशीनों पर पूरी तरह से आश्रित हो जाना बिल्कुल भी सही नहीं है।

 

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