मरने से पहले ही लोग कर रहे हैं अपना अंतिम संस्कार, पीछे की वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

यहां के लोगों में अपनी मौत से पहले ही अंतिम संस्कार का चलन है। सुनने में भले ही विचित्र लगें, लेकिन यह सच है।

September, 1312:46 PM

अजब गजब

नई दिल्ली। इस धरती पर आने वाले हर इंसान को एक न एक दिन यहां से जाना ही होगा। यही संसार का नियम है और सदियों से ऐसा ही होता आ रहा है। निर्धारित समय आने पर सभी को अपना शरीर त्यागकर इस लोक से परलोक जाना पड़ता है।

इंसान की जब मृत्यु होती है तो धर्म और समुदाय के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाता है ताकि उसकी आत्मा को शान्ति मिल सकें। मौत के बाद किसी का अंतिम संस्कार करवाना स्वाभाविक है, लेकिन मौत से पहले भला ऐसा कौन करता है।

Hyowon Healing Center in Seoul

मौत एक ऐसी चीज है जिससे डर सभी को लगता है ऐसे में जीवित रहते हुए स्वयं जाकर अपनी पारलौकिक क्रियाएं करवाना वाकई में बेहद अजीब है। कुछ ऐसा ही कर रहे हैं दक्षिण कोरिया के लोग।

बता दें, दक्षिण कोरिया में लोगों में अपनी मौत से पहले ही अंतिम संस्कार का चलन है। सुनने में भले ही विचित्र लगें, लेकिन यह सच है। दक्षिण कोरिया के सियोल में एक ऐसा ही सेंटर है जहां आकर लोग अपना अंतिम संस्कार करवाते हैं।

Hyowon Healing Center in Seoul

इस सेंटर में इच्छुक व्यक्तियों के लिए नकली अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। अब तक हजारों लोग यहां आकर ऐसा कर चुके हैं। हालांकि यहां के लोगों और इस सेंटर का ऐसा मानना है कि ऐसा करने के पीछे जिंदगी को सकारात्मक ढंग से देखने की धारणा निहित है।

 

Hyowon Healing Center in Seoul

लोगों का ऐसा मानना है कि इससे मौत का डर समाप्त हो जाता है। अंतिम संस्कार के दौरान सबसे पहले उन्हें भाषण के जरिए आध्यात्मिक बातों को समझाया जाता है। इतना ही नहीं, कुछ वीडियो के माध्यम से उन्हें कुछ निर्देश भी दिए जाते हैं। इन सारी प्रक्रियाओं के बाद अब उन्हें एक कमरे में ले जाया जाता है। यहां लोग अपनी वसीयत लिखते हैं। चौथे क्रम में उन्हें ताबूत में एक शव की तरह सुला दिया जाता है। इसे वास्तविक रुप देने के लिए ताबूत को 10 मिनट के लिए बंद कर दिया जाता है। ऐसा करके लोग अपने मन से मौत के लिए मन में पल रहें डर को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं।

 

Hyowon Healing Center in Seoul

इस कार्यक्रम में शामिल होने वालों में ज्यादातर ऐसे लोग होते हैं जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। सेंटर में इन कार्यक्रमों के जरिए उन्हें अंतिम समय के लिए मानसिक रुप से तैयार किया जाता है ताकि वे हर रोज डर-डर कर ना जिए बल्कि जितना भी समय उनके पास है, वे खुलकर जिए। इसके माध्यम से मन में बदलाव लाया जा सकता है।

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