इस 2 हजार साल पुरानी सुरंग में आदमी बनते थे भगवान! इन लोगों ने ऐसे ढूंढ निकाला था

  • मेक्सिको में है ये सुरंग
  • पहली बार रोबोर्ट की ली गई थी मदद

Prakash Chand Joshi

November, 2905:21 PM

नई दिल्ली: दुनिया में कई ऐसी गुफाएं हैं, जिनमें नाजाने कितने चमत्कारी रहस्य छुपे हुए हैं। लेकिन इन रहस्यों को हर कोई जान पाए ये लगभग मुमकिन नहीं। ऐसी ही एक गुफा है मेक्सिको ( Mexico ) में। दरअसल, साल 2003 के अक्टूबर महीने में पुरातत्वविद् सर्जियो गोमेज 'पिरामिड ऑफ तियोथिहुआकेन' के संरक्षण में लगे हुए थे। वहीं एक रात सर्जियो गोमेज अपने काम में लगे हुए थे। इस रात बारिश भी हो रही थी और बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने लगा, जहां पर एक छेद हो गया। इसके अगल दिन गोमेज रस्सी के सहारे इस छेद के अंदर गए और लगभग 14 मीटर जाने के बाद उन्हें एक सुरंग दिखाई दी।

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खचाखच भरी थी बस, लेकिन जब ड्राइवर ने साइड शीशे से पिछली सीट पर देखा तो हैरान रह गया....

आदमी बनते थे भगवान

एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 'सुंरग देखते ही मुझे लगा कि ये कोई जरूरी चीज है, लेकिन उस समय तक मुझे इसकी अहमियत का अंदाजा नहीं था। लेकिन कुछ समय बाद हमें समझ आया कि ये सुरंग 2000 साल पहले तियोथिहुआकेन शहर ने बनाई थी।' दरअसल, तियोथिहुआकेन शब्द का मतलब होता है कि 'जहां आदमी भगवान बनता है।' विशेषज्ञ की माने तो 'क्लासिकल पीरियड के दौरान हिस्पैनिक काल से पहले अमरीकी महाद्वीप में ये सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर था।' इस शहर में अलग-अलग विचारों और पृष्ठभूमियों के लोग आया करते थे। यहां आकर वो इस शहर में मौजूद अवसरों का लाभ उठाते थे।

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पहली बार रोबोट्स का इस्तेमाल

इस सुरंग की तलाश करने के लिए जो अभियान चलाया गया उसे 'त्लालोकन' कहा गया। इसका मतलब धरती के अंदर रास्ता है। गोमेज के मुताबिक, ये सुरंग इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी तलाश करने में उस तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिसे किसी अन्य परियोजना में इस्तेमाल नहीं किया गया, जिसमें लेजर स्कैनर और दो रोबोट्स शामिल हैं। ये पहला मौका था जब मेक्सिको में किसी पुरातात्विक खोज में रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया हो। इससे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल केवल मिस्र में हुआ। ये सुरंग बीते लगभग 1700 सालों से बंद थी, लेकिन साल 2009 में इसकी तलाश शुरू की गई।

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ऐसी है ये सुरंग

पाइपनुमा संरचना के दूसरे मुहाने पर एक खुली जगह थी और तियोथिहुआकेन वाली की बनाई इस सुरंग ( Tunnel ) में 3 कमरे हैं। इसके मुख्य द्वार से आखिरी तक इसकी कुल लंबाई 103 मीटर है और 14 मीटर की गहराई से शुरू होकर इसकी गहराई 18 मीटर तक जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तियोथिहुआकेन में जो लोग रहते थे उन्होंने इस सुरंग का इस्तेमाल किया, लेकिन फिर इसे बंद कर दिया गया। गोमेज बताती हैं कि उन्होंने इस सुरंग की तलाश में बड़ी ही सावधानी से 8 साल लगए हैं। सुइयों और ब्रश की मदद से हजारों टन मिट्टी और पत्थरों को हटाया गया। वहीं अब इस सुरंग के मुहाने को बंद कर दिया गया है। ऐसे में ये आम लोगों को नहीं दिखेगी।

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