अनोखी तकनीक 'मास्क' से बनेगी डबल लेन की एक किमी लंबी सड़क !

- दो लेन की एक किलोमीटर सड़क बनाने के लिए रीसाइकल की गई सामग्री में लगभग 30 लाख मास्क का उपयोग होगा, जिससे 93 टन कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा।

By: विकास गुप्ता

Published: 13 Apr 2021, 01:27 PM IST

चेन्नई। कोरोना वायरस महामारी ने न केवल दुनिया भर में स्वास्थ्य संकट पैदा किया है, बल्कि यह अब पर्यावरण को भी खतरे में डाल रहा है। महामारी के खिलाफ लडऩे और इस्तेमाल किए गए व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपकरण, फेस मास्क के निपटान से जुड़े पर्यावरणीय खतरों को कम करने के लिए अब शोधकर्ताओं ने उपाय ढूंढ निकाला है। किस तरह महामारी से उत्पन्न कचरे जैसे- उपयोग किए गए फेस मास्क का इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जा सकता है। इससे दो फायदे होंगे, एक ओर जहां यहां-वहां बिखरे फेस मास्क के कूड़े से निजात मिलेगी, वहीं दूसरी ओर इसका उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाएगा। अध्ययन से पता चलता है कि दो लेन की सड़क के सिर्फ एक किलोमीटर बनाने के लिए रीसाइकल की गई सामग्री में लगभग 30 लाख मास्क का उपयोग होगा, जिससे 93 टन कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा।

सड़क बनाने की सामग्री की विकसित-
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न की आरएमआइटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने फेस मास्क का उपयोग कर नई सड़क बनाने वाली सामग्री विकसित की है। यह सामग्री सिविल इंजीनियरिंग सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई है। इसमें एक बार उपयोग होने वाले फेस मास्क और भवन बनाने वाले मलबे का मिश्रण शामिल है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े खतरों को दूर करने में सहायक होगा शोध-
वि श्लेषण से पता चलता है कि फेस मास्क सड़कों और फुटपाथ की परतों के लिए डिजाइन किए जाने वाले उत्पाद में मजबूती प्रदान करते हैं। दुनिया भर में रोज अनुमानित 680 करोड़ डिस्पोजेबल फेस मास्क का उपयोग किया जाता है। शोधकर्ता डॉ. मोहम्मद सबेरियन ने कहा, इस प्रारंभिक शोध ने सड़कों में एक बार उपयोग किए जाने वाले मास्क को रीसाइकल करने की संभावना पर ध्यान दिया। यह देखकर उत्साहित हुए कि यह न केवल काम करता है, बल्कि इसके इंजीनियरिंग लाभ भी हैं। हमें उम्मीद है, यह आगे के शोध के लिए दरवाजे खोलेगा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े खतरों के प्रबंधन के तरीकों के आधार पर काम करेगा। इसका पता लगाया जा सकेगा कि इसी तरह क्या पीपीई भी रीसाइक्लिंग के लिए उपयुक्त होंगे। शोधों में इस्तेमाल किए गए मास्कों को पूरी तरह से कीटाणुरहित, स्टरलाइज करने के बाद उपयोग किया गया। यह अध्ययन साइंस ऑफ द टोटल एन्वायर्नमेंट में प्रकाशित हुआ।

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