यहां दशहरे से 6 महीने पहले हो जाता है रावण दहन, हिंदू-मुस्लिम मिलकर करते हैं ये खास काम

यहां दशहरे से 6 महीने पहले हो जाता है रावण दहन, हिंदू-मुस्लिम मिलकर करते हैं ये खास काम

Prakash Chand Joshi | Publish: Oct, 08 2019 02:30:39 PM (IST) अजब गजब

  • काटी जाती है रावण की नाक

नई दिल्ली: विजयदशमी के मौके पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। कहते हैं इस दिन बुराई की अच्छाई पर जीत हुई थी। श्री रामचंद्र ने रावण का वध किया था क्योंकि उसके पापों का घड़ा भर चुका था। लेकिन आपको शायद ये नहीं पता होगा कि कई जगहों पर रावण को भगवान जैसा दर्जा भी दिया जाता है। जैसे कि मध्य प्रदेश के रतलाम में।

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रावण बेहद ज्ञानी था और उसके जैसा शिव भक्त शायद ही कोई दूसरा हुआ और होगा। शायद यही वजह हो सकती है कि मध्य प्रदेश के रतलाम में रावण को ऐसा दर्जा दिया जाता है। दरअसल, एमपी के रतलाम जिले के चिकलाना गांव में विजयदशमी से 6 महीने पहले ही रावण की मूर्ति की नाक काटकर उसका अंत कर दिया जाता है। सबसे खास बात है कि इस दौरान हिंदू समुदाय के लोगों के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। साथ ही यहां दूर-दूर से लोग ये देखने के लिए भी आते हैं। रावण का जिस दिन जन्म हुआ था, ठीक उसी दिन उसका वध भी हुआ था।

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वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा में रावण का मंदिर है। साथ ही यहां के लोग रावण की पूजा करते हैं। जब यहां के लोग कोई नया वाहन खरीदते हैं तो उस पर 'जय लंकेश' लिखवाते हैं। हिमाचल प्रदेश के शिव नगरी चंबा के भरमौर में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता। यहां ऐसा करना अभिषाप माना जाता है। गौरतलब, है कि रावण ने भले ही कितने ही पाप किए हो लेकिन जब उसका श्री रामचंद्र जी ने वध किया, तो उसकी कई अच्छाईओं की वजह से उसे जीने का एक मौका देना चाहा। लेकिन रावण ने दोबारा जिंदा होने से मना कर दिया था।

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