प्रशान्त महासागर की गहराई में वैज्ञानिकों के हाथ लगी यह जादुई चीज, देखकर चौंक गई दुनिया

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई मछली को ढूंढ निकाला है जो पानी की सतह पर आते ही पिघलने लगती है।

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Published: 12 Sep 2018, 03:55 PM IST

नई दिल्ली। वैज्ञानिक हर रोज किसी न किसी चीज की खोज में लगे रहते हैं। इसी के चलते लगभग हर रोज वे अपने नए-नए आविष्कारों से लोगों को चकित कर देते हैं। इन्हें देखकर दुनिया हैरान रह जाती है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई मछली को ढूंढ निकाला है जो पानी की सतह पर आते ही पिघलने लगती है। प्रशांत महासागर में करीब आठ किलोमीटर नीचे मछली की यह प्रजाति पाई गई। बता दें, वैज्ञानिकों को स्नेलफिश की तीन प्रजातियां मिली है।

 

Snail fish

मछली की इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पानी की सतह पर आने मात्र से ही यह पिघलने लगती है। पेरू और चिली के तट से 160 किमी दूर महासागर की तलहटी में मिली मछलियों की यह प्रजाति देखने में भी बड़ी ही विचित्र है। बेहद नाजुक और जेलीनुमा दिखने वाली इन मछलियों का रंग भी बेहद अजीब है।

 

Snail fish

स्नेलफिश समुद्र के नीचे ठंडे जल में रहती है। सतह पर आते ही ये आइसक्रीम की तरह पिघलने लगती है। प्रशान्त महासागर में साढ़े सात हजार मीटर नीचे तैरने वाली इन मछलियों के फोटो लेने में भी वैज्ञानिक सफल रहें। स्नेलफिश की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि भले ही ये दिखने में कमजोर लगें,लेकिन भारी पानी के दबाव को भी ये आसानी से सह लेती है।

Snail fish

जेलीनुमा संरचना के कारण ही इनके लिए इस भार को सहना आसान होता है। इनकी सबसे मजबूत हड्डी इनके कानों और दांतों में होती है। कानों की हड्डी के वजह से ही ये आसानी से संतुलन स्थापित कर सकती है।

 

Snail fish

सबसे पहले दुर्लभ प्रजाति की इस एक मछली को एचडी कैमरे से युक्त फंदे की मदद से फंसाया गया। एक के बाद बाकी की मछलियां भी अपने आप फंदे में फंसती गईं। दुर्लभ प्रजाति की इन मछलियों को सुरक्षित रखा गया है। बता दें, एचडी कैमरा सिस्टम को समंदर की तलहटी तक जाने में करीब चार घंटे का समय लगा। इसके बाद मछलियों संग इसे बाहर आने में 12-14 घंटे का वक्त लगा।

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