अनोखा मंदिर! खून चढ़ाने के बाद मिलता है प्रवेश, भगवान की नहीं बल्कि इनकी होती हैं पूजा

अपने देश के लोग धर्म के प्रति गहरी आस्था रखते है। इसी का प्रमाण है कि आप किसी भी राज्य के किसी भी कोने में चले जाओ आपको वहां पर एक चत्मकारी मंदिर जरूर मिलेगा। सदियों से यहां पर ऋषि- मुनी तप कर इस धरती को स्वर्ग की तरह बनाया। आज भी लोगों में धर्म को लेकर गहरी आस्था है।

By: Shaitan Prajapat

Published: 28 Oct 2020, 04:11 PM IST

अपने देश के लोग धर्म के प्रति गहरी आस्था रखते है। इसी का प्रमाण है कि आप किसी भी राज्य के किसी भी कोने में चले जाओ आपको वहां पर एक चत्मकारी मंदिर जरूर मिलेगा। सदियों से यहां पर ऋषि- मुनी तप कर इस धरती को स्वर्ग की तरह बनाया। आज भी लोगों में धर्म को लेकर गहरी आस्था है। अपने अब कई चमत्कारी मंदिरों के बारे में सुना और पढ़ा होगा। आज आपको एक अनोखी मंदिर के बारे में बताने जा है जहां पर खून चढ़ाने के बाद मंदिर में प्रवेश मिलता है। यह पढ़ने में भले ही आपको अजीब लगे लेकिन यह बिल्कुल सच है। हम बात कर रहे है द्रोपदी के मंदिर की जो दक्षिण कर्नाटक के बंगलुरू में स्थित है। यहां पर किसी भगवान की नहीं बल्कि कौरव और पांडवों की पूजा की जाती है।

यह भी पढ़े :— ये दो लोग नहीं डरते खौलते तेज से भी, बेझिझक डाल देते है कड़ाई में हाथ, देखें वीडियो

Kauravas and Pandavas

कौरव और पांडवों की होती है पूजा
कई प्राचीन मंदिर देश की सर्वश्रेष्ट धरोहर है। जिनसे जुड़े रहस्य आज तक राज बने हुए हैं। इन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था के साथ आपको चमत्कार भी देखने को मिलेंगे। कई लोगो के लिए यह कौतूहल भी है। क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां आते है। इस मंदिर को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इसमें कभी द्रौपदी ने पूजा की थी। कि हम बात कर रहे है द्रोपदी के मंदिर की जो दक्षिण कर्नाटक के बंगलुरू में स्थित है। आपको यह जानकर हैरानी होगी इस मंदिर किसी भगवान की पूजा नहीं की जाती बल्कि कौरव और पांडवों की पूजा होती है।

यह भी पढ़े :— ये है 5 टन का आलू, एक रात के लिए लोग देते हैं इतनी रकम

Kauravas and Pandavas

चढ़ाते है अपना खून
ऐसी मान्यता है कि यहां पर श्रद्धालु प्रसाद नहीं बल्कि अपना खून अर्पित करते है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 800 साल पहले किया गया था। इस प्रचीन मंदिर को धर्मराय स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि देवों की नगरी उत्तराखंड के उत्तरकाशी के सारनौल में स्थित एक मंदिर है, जिसे दानवीर कर्ण का मंदिर कहा जाता है। ऐसा कहते है कि यह मंदिर लकड़ियों से बना हुआ है जिसमें पांडवों के 6 छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं। मान्यता है कि हिडिंबा मंदिर में लोग आज भी प्रसाद के रूप में अपना खून चढ़ाते हैं। कई लोगों के लिए यह आस्था का केंद्र बना हुआ है।

Show More
Shaitan Prajapat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned