दशहरे पर पान खाना क्यों हैं जरूरी,जानें इसके पीछे छुपे तथ्य के बारे में

  • दशहरे के दिन अस्त्र-शस्त्र की जाती है पूजा
  • दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं

By: Pratibha Tripathi

Updated: 28 Oct 2020, 04:46 PM IST

नई दिल्ली। नवरात्र पूरे होने के बाद दसवें दिन दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। जिसकी धूम पूरे देश में बड़े जोर शोर के साथ होती है। विजयदशमी का त्यौहार सत्य पर असत्य की जीत का सबसे बड़ा त्योहार है इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजन करने की परंपरा निभाई जाती है। जो सदियों से चली आ रही है.

इसी तरह की कई और बातें हैं जो दशहरे के दिन की जाती है। जिसनमें से सबसे खास बात यह है कि इस दिन हनुमानजी को पान का बीड़ा चढ़ाया जाता है। क्योंकि पान हनुमाजी को बहुत पसंद है

दशहरे के दिन क्यों है पान का महत्व...

पान को सत्य के रास्ते पर चलने का प्रतीक माना गया है। पान को 'बीड़ा' शब्द से भी जाना जाता है। जिसका अर्थ ही होता है कि हम सही रास्ते पर चलने का 'बीड़ा' उठाते हैं। पान प्रेम और त्याग का पर्याय है। दशहरे में रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने की परम्परा है। ऐसा माना जाता है दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं.

शुभ कामों में पान का महत्व

कहा जाता है कि पान का पत्ता मान और सम्मान का प्रतीक है। इसलिए हर शुभ कार्य में जैसे पूजा पाठ सेलेकर खानपान में इसका उपयोग किया जाता है। नवरात्रि पूजन के दौरान भी मां को पान-सुपारी चढ़ाने का विधान होता है.।इसी के साथ पान के पत्ते का उपयोग विवाह से लेकर कथा पाठ तक हर शुभ काम में किया जाता है।

बीमारियों से रक्षा करता है पान

शारदीय नवरात्रि की शुरूआत बदलते मौसम के दौरान ही होती है। जब वर्षा के बाद जाड़े का मौसम आ रहा होता है। इस समय संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में यह परम्परा लोगों की बीमारियों से रक्षा करती है। नौ दिन के उपवास के बाद लोग अन्न ग्रहण करते हैं जिसके कारण उनकी पाचन की क्रिया प्रभावित होती है। पान का पत्ता पाचन क्रििया को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है।

Pratibha Tripathi
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