दर्द के डर से जिस बच्चे को नहीं दिया था जन्म, 46 साल बाद यूं आया बाहर

Amanpreet Kaur

Publish: Sep, 16 2017 01:18:54 (IST)

Weied News
दर्द के डर से जिस बच्चे को नहीं दिया था जन्म, 46 साल बाद यूं आया बाहर

यह घटना सुनकर आप भी कह उठेंगे कि ऐसा भी होता है। बेशक इस घटना पर यकीन करना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन यह घटना सच्ची है

नई दिल्ली। यह घटना सुनकर आप भी कह उठेंगे कि ऐसा भी होता है। बेशक इस घटना पर यकीन करना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन यह घटना सच्ची है। आमतौर पर नौ माह गर्भ में रहने के बाद बच्चे का जन्म होता है, लेकिन इस केस में बच्चे का जन्म 46 साल बाद हुआ। 1955 में मोरक्को से पहली बार यह अनोखा मामला सामने आया था। उस समय जाहरा अबौतालिब 26 साल की थीं और लेबर पेन होने के बावजू वो बच्चे को जन्म नहीं दे पाई थीं। सिजेरियन के दौरान जान जाने का खतरा समझ उसने बच्चे को जन्म ही नहीं दिया था।

जाहरा १९५५ में अपने पहले बच्चे को जन्म देने वाली थी, लेकिन 48 घंटे तक लेबर पेन सहने के बावजूद बच्चे का जब जन्म नहीं हुआ तो उसे हॉस्पिटल लाया गया। इससे पहले जाहरा ने एक महिला को बच्चे को जन्म देते समय मरते देखा था। इसी डर से वह हॉस्पिटल से भाग गई। हॉस्पिटल से जाने के कई दिनों बाद तक, जाहरा के पेट में दर्द होता रहा। उसे लगता था कि अब उसकी डिलिवरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ दिनों बाद जाहरा को दर्द होना बंद हो गया।

मोरक्को में माना जाता है कि बच्चा मां के गर्भ में सालों सो सकता है। इसी को सोचकर जाहरा ने भी अपनी प्रेग्नेंसी की बात भुला ली और तीन बच्चों को गोद ले लिया। इस घअना को 46 साल बाद अचानक जाहरा के पेट में तेज दर्द उठा। जब उसका एमआरआई स्कैन करवाया गया तो डॉक्टर्स भी हैरान रह गए। वह बच्चा अभी तक उसके पेट में ही मौजूद था। सर्जरी कर इस बच्चे को निकाला गया तो डॉक्टर्स ने इसे स्टोन बेबी का नाम दिया, क्योंकि इतने समय तक गर्भ में रहने के कारण बच्चा पत्थर में बदल गया था।

2001 में जब जाहरा के पेट में तेज दर्द उठा तो उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां के विशेषज्ञ प्रोफेसर टैबी ओज्जानी को पहले लगा कि जाहरा की ओवरी में ट्यूमर है और उसने जाहरा का अल्ट्रासाउंड करवाया। जाहरा के एमआरआई रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि उसके पेट में कोई ट्यूमर नहीं था, बल्कि 1955 में जिस बच्चे को जाहरा जन्म नहीं दे पाई थी, वही उसके पेट दर्द का कारण था। यह बच्चा उसके पेट में ही रह गया था। सालों बाद अब वो पत्थर में बदल गया था। ये बच्चा जाहरा के बॉडी पार्ट्स से जुड़ गया था। चार घंटे सर्जरी के बाद इसे जाहरा के शरीर से अलग किया गया। यह बिल्कुल हार्ड और सॉलिड हो चुका था।

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