जल जीवन

Best Hindi Poetry: जल जीवन

By: Deovrat Singh

Published: 21 Aug 2021, 11:13 PM IST

वर्क एंड लाईफ

जल जीवन
विकास चतुर्वेदी 'अरमान'

जल से ही आज है
जल से ही है कल
जल बिन मीन तो क्या
सगरा चराचर रहता विकल
वुजू भी ये कराता है
तिलक भी ये लगाता है
आंखों से अश्रुधार बनकर
मन के मैल बहाता है
झरनों का यह जलतरंग
सावन भादो का मृदंग
प्यासों को घट भर पानी
गागर में सागर कहलाता है।
जन्म पर कुआं पूजन
मौत पर अस्थि विसर्जन
पानी से सीखो जीना
इसीलिए जीवन कहलाता है।
गर बनाना है मजबूत मुट्ठी
इसकी फितरत पर जाओ
तुम सारी नदियों को जोड़-जोड़
समंदर भी ये बनाता है।
सत्तर प्रतिशत शरीर का जल
तुम्हारी आत्मा क्यों नहीं हिलाता है।
अब तो बस यही बचा 'अरमान'
पीढिय़ों तक बचे यह जल
हरे-भरे हों खेत-खलिहान
गंगो-चिनाब हरदम सजल
यही तो तुमको पानीदार बनाता है
तटबंधों के भीतर चलना ये सिखाता है।

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