आदर्श समाज का निर्माण करते है शिक्षक

आदर्श समाज का निर्माण करते है शिक्षक

Jameel Khan | Publish: Sep, 04 2018 05:05:08 PM (IST) वर्क एंड लाईफ

आचार्य चाणक्य ने कहा है –च्च्शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं।

आचार्य चाणक्य ने कहा है –च्च्शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं। समाज के निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। शिक्षक ही है, जो समाज में किसी व्यक्ति को एक अच्छा नागरिक बनाने के साथ उसका सर्वोत्त्म विकास भी करते है। शिक्षा देने के साथ ही वह उसे एक पेशेवर व्यक्ति बनने और एक अच्छा नागरिक बननें के लिए प्रेरित करता है।

संसार में मौजूद सभी सफल व्यक्तियों के पीछे एक शिक्षक की अहम भूमिका जरुर रहती है। एक बच्चे को मार्गदर्शन देने के साथ शिक्षक उसे उसके व्यक्तित्व से भलिभांति परिचित कराता है, उसके अंदर छिपे समस्त गुणों से भलिभांति अवगत कराता है। वैसे तो शिक्षक हमेशा से ही सर्वोपरि रहे हैं और आज भी शिक्षक सभी के लिए आदर्श और माननीय हैं।

देखा जाए तो बच्चे संसार रुपी बगिया के फूल हैं जो अपनी सुगंध से सबकुछ सुगन्धित कर डालते हैं। और शिक्षक उस माली के समान है जो अपनी देख-रेख में पौधे लगाकर उन फूलों के सर्वागीण विकास की दिशा में कार्य करते हैं। उनका महत्व इसी बात से पता चलता है कि वे बच्चों के ऐसे पथ प्रदर्शक हैं जो अपने परिश्रम और तप से बच्चों के चरित्र निर्माण की क्षमता रखते हैं। वे बच्चों के प्रेरक हैं जो उन्हें कुछ कर दिखाने की प्रेरणा देते हैं।अतः शिक्षक को ऐसा पथ प्रदर्शक बनकर रहना होगा जो केवल किताबी ज्ञान ही न देकर बल्कि बच्चों को जीवन जीने की कला सीखा दे। और अपने आप में हमेशा के लिए एक उदाहरण बन जाए।

आज शिक्षक का पद अपने आप में महत्वपूर्ण तो है ही, इसके साथ-साथ चुनौतीपूर्ण और कठिन भी है। वर्तमान में बच्चों के लिए अच्छा शिक्षक बनना अत्यंत कठिन हैं। जिसके लिए कुछ गुण होना बहुत जरूरी है, जिनको पूरा करके ही अच्छा शिक्षक बना जा सकता है। जैसे कि संयम, सदाचार, विवेक, सहनशीलता, सृजनशीलता, शुद्ध उच्चारण, शोध वृत्ति, प्रभावशाली वक्ता एवं सुन्दर लेखन आदि अनेक ऐसी बातें हैं जो किसी भी शिक्षक को इस समय का अच्छा शिक्षक बना सकती हैं।

आज हमारे समक्ष ऐसे अनेक उदाहरण है जो शिक्षक की परिभाषा को पूर्ण करने में भूमिका अदा करते हैं। इन शिक्षकों में अच्छे और श्रेष्ठ गुणों का भण्डार होता है। ये समय का सदुपयोग करते हैं। इनके लिए समय अमूल्य होता है और इसलिए ये समय का पालन करते हुए अपना प्रत्येक कार्य योजनानुसार करते हैं। ये समय की उपयोगिता को ध्यान में रखकर अपना ज्ञान प्रदान करते हैं। इनमें नम्रता और श्रद्धा के भाव भरे होते है। क्रौध और घृणा या द्वेश की भावना इनमें नहीं है। ये सहनशीलता, सही व्यवहार को अपनाकर बच्चों को सही शिक्षा प्रदान कर उनका मार्गदर्शन करते हैं। ये उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाते हुए उन्हें बेहतर इंसान बनाते हैं। ये अनुशासन प्रिय बनते हुए बच्चे को अनुशासन का महत्व सिखाते हैं। ऐसे शिक्षक ही आदर्श समाज के निर्माण में अपना योगदान दे रहे है ।

 

 

देशना जैन

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