मेघों का आगमन

मेघों का आगमन

By: Deovrat Singh

Published: 18 Jul 2021, 10:40 PM IST

Best Poetry: मेघों का आगमन

छत्र मेघों का यहाँ छाया घना है।
एक एक चंदोवा सदृश्य फिर से तना है।

तप्त धरती के अधर पे पपडियां हैं।
नीर बरसा के सभी कुछ सींचना है।

संगठित हो वाष्प कण वारिद बनेंगे।
बादलों से पाठ हमको सीखना है।

बूँद का ले रूप धरती पर उतरते।
योग वर्षा का अनूठा अब बना है।

पावसी ऋतु में जलज आ चैन देते।
शुष्क मौसम को तभी तो बीतना है।

घन घनन घन कर रही मेघावली यूँ।
दुंदुभी सा स्वर लगे पहले सुना है।

चाहतीं शीतल फुहारें आसमानी।
मन खुशी से भर सकें जो अनमना है।

*कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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