चीन के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से जासूसी का खतरा

2025 मेड इन चाइना प्रोग्राम’ के तहत चीन ने तीन हजार करोड़ रुपए का निवेश दस ऐसे उद्योगों में किया जो एक रणनीति के हिसाब से शुरू किए गए हैं।

By: manish singh

Published: 15 Nov 2018, 10:08 PM IST

चीन में बने इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, सॉफ्टवेयर और साइबर अटैक अमरीका समेत अन्य देशों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। बीजिंग तकनीक के क्षेत्र में पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाना चाहता है जो सभी देशों के लिए खतरा बना हुआ है। इसका खुलासा अमरीकी कॉंग्रेस रिसर्च सर्विस की कॉंग्रेशनल चार्टर्ड एडवाइजरी कमीशन की रिपोर्ट में हुआ है। सूचना तकनीक से जुड़े उत्पादों के निर्माण पर चीन करीब से नजर रखता है। रिपोर्ट तैयार करने वाली जेनिफर बिसग्लि बताती हैं कि अमरीकी सरकार चीनी उत्पादों की खरीदारी में करीब नौ हजार करोड़ रुपए सालाना खर्च करती है। ये चीन के लिए एक मौका है जिससे वे अमरीका के सरकारी दफ्तरों में जासूसी कर सके । वे कर भी रहे हैं और हम उनके लिए कोई परेशानी भी नहीं खड़ी कर पा रहे हैं। कपड़े और खिलौना के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाने के बाद अब उसकी तैयारी तकनीक और सेना में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में अपना दखल बढ़ाना है।

चीन अमरीका की टेक्नोलॉजी कंपनियों से साफ्टवेयर कोड और उनकी बारीकियों के बारे में जानकारी लेना चाहता है जिसका गलत फायदा उठा सके। नेशनल इकोनॉमिक्स काउंसिल के निदेशक लैरी कुडलो का मानना है कि चीन पहला वैश्विक अर्थव्यवस्था वाला देश है जो अर्थव्यवस्था को लेकर तीसरे दर्जे का घटिया व्यवहार कर रहा है। कंप्यूटर राउटर, सॉफ्टवेयर और प्रिंटर बनाने वाली दुनिया की बड़ी कंपनियां भी चीनी कंपनियों पर निर्भर हैं। सूचनाक्रांति के साथ सुरक्षा को लेकर सोचना जरूरी है नहीं भविष्य में नुकसान होगा। 2025 मेड इन चाइना प्रोग्राम’ के तहत चीन ने तीन हजार करोड़ रुपए का निवेश दस ऐसे उद्योगों में किया जो एक रणनीति के हिसाब से शुरू किए गए हैं। दुनिया के सभी देश अब इस ओर ध्यान देने लगे हैं क्योंकि भविष्य में चीनी उपकरणों से जासूसी देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा करने के साथ आर्थिक स्थिति को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसी कड़ी में साइबर अटैक दुनियाभर के लिए चुनौती बना हुआ है।

manish singh Desk
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