पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर तैनात होगी चीनी नौसेना, भारत आैर अमरीका के लिए है चुनौती

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के तहत बनने वाले सामरिक महत्व के ग्वादर बंदरगाह और व्यापारिक रास्तों की हिफाजत के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन की नौसेना अपने जहाज यहां तैनात करेगा।

By: Abhishek Pareek

Published: 26 Nov 2016, 12:12 PM IST

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के तहत बनने वाले सामरिक महत्व के ग्वादर बंदरगाह और व्यापारिक रास्तों की हिफाजत के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन की नौसेना अपने जहाज यहां तैनात करेगा। पाकिस्तान की यह योजना भारत के लिए चिंताजनक हो सकती है। पाकिस्तान की नौसेना के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।




सीपीईसी परियोजना 46 अरब डॉलर की है। चीन और पाकिस्तान अरब सागर में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिंजियांग प्रांत से जोडऩे के लिए करीब 3,000 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बना रहे हैं। यह कदम चीन में तेल परिवहन के लिए एक नया और सस्ता मालवाहक मार्ग खोलेगा। साथ ही, इस रास्ते से चीनी वस्तुओं का मध्यपूर्व और अफ्रीका में निर्यात होगा।




नौसेना की भूमिका अहम

पाकिस्तानी नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि ग्वादर बंदरगाह को क्रियान्वित किए जाने और सीपीईसी के तहत आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के बाद समुद्री बलों की भूमिका बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि चीन सीपीईसी के तहत बंदरगाह और व्यापार की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान नौसेना के सहयोग से नौसेना के जहाज तैनात करेगा। इससे पहले चीन यस कहने से बचता रहा है कि उसकी योजना ग्वादर में नौसैन्य पोत तैनात करने की है।




अमरीका और भारत के लिए चुनौती

यह कदम अमरीका और भारत में चिंता पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीपीईसी और ग्वादर बंदरगाह चीन और पाकिस्तान की सैन्य क्षमताएं बढ़ाएगा व अरब सागर में चीनी नौसेना की आसान पहुंच को संभव बनाएगा। ग्वादर में नौसैनिक अड्डा होने से चीनी जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अपने बेड़े की मरम्मत और रखरखाव जैसे कार्य के लिए भी बंदरगाह का इस्तेमाल कर पाएंगे। ऐसी कोई भी सुविधा चीन की नौसेना के भविष्य के मिशन्स के लिए उसे सहयोग प्रदान करने वाली पहली वैदेशिक सुविधा होगी। पाकिस्तानी रक्षा अधिकारी चाहते हैं कि चीनी नौसेना हिंद महासागर और अरब सागर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराए। 




पाकिस्तान के अंदर भी उठ रहे हैं सवाल

एक पाक अधिकारी ने यह भी बताया कि नौसेना चीन और तुर्की से तेज गति वाले जहाज खरीदने पर भी विचार कर रही है ताकि सुरक्षा लिहाज से ग्वादर बंदरगाह पर अपनी एक विशेष टुकड़ी तैनात कर सके। उन्होंने कराची एक्सपो सेंटर में आइडियाज 2016 में कहा कि एक टुकड़ी में 4 से 6 जंगी जहाज होंगे। कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि इस आर्थिक गलियारे को लेकर पाकिस्तान के अंदर भी काफी सवाल खड़े हो रहे हैं। 




खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी सरकार द्वारा चीन को इतनी दखलंदाजी किए जाने की इजाजत पर आपत्तियां खड़ी हो रही हैं। साथ ही, ये सवाल भी उठ रहे हैं कि चीन भविष्य में भारत के साथ व्यापार के लिए भी सीपीईसी का इस्तेमाल कर सकता है। उधर, बलूचिस्तान में इस आर्थिक गलियारे को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। वहां के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहा है।
Abhishek Pareek
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