
Japan to reject Co operation with China over Uyghur Muslims genocide
China: चीन और जापान के रिश्तों में सुधार लाने वाले प्रयासों को एक बड़ा झटका लग सकता है। ये झटका किसी और से नहीं बल्कि चीन की खुद की करनी के चलते लगेगा। दरअसल उइगर मुसलमानों (Uyghur Muslims) की स्थिति को लेकर उइगर अमेरिका नेता सालेह हुदयार ने जापान (Japan) के प्रधानमंत्री से चीन के साथ किसी भी तरह के सहयोग को करने से मना करने का आग्रह किया है। पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता की वकालत करने वाले सालेह हुदयार ने जापान से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने टोक्यो (Tokyo) से चीन के साथ सहयोग करने से परहेज करने का आह्वान किया। उन्होंने X पर पोस्ट किया कि "जापान (Japan) को चीन के नरसंहार शासन के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए, जो पूर्वी तुर्किस्तान में उइगर नरसंहार जारी रखता है। चीन के साथ सहयोग मानवता और न्याय के साथ-साथ जापान की अपनी सुरक्षा के साथ विश्वासघात करता है। हम जापान के प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे स्वतंत्रता के साथ जुड़ें, न कि अत्याचार के साथ।"
सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि सालेह का ये बयान जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक्स पर पोस्ट किए गए एक पोस्ट के जवाब में आया, जिसमें लिखा था, "मैंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और पुष्टि की कि हम राष्ट्रपति शी के साथ 'रणनीतिक पारस्परिक लाभ संबंध' को व्यापक रूप से बढ़ावा देने और 'रचनात्मक और स्थिर संबंध' बनाने के लिए एक व्यापक दिशा साझा करते हैं। हम दोनों देशों के बीच मुद्दों और लंबित मामलों को कम करने और सहयोग और सहभागिता बढ़ाने के लिए संचार को मजबूत करेंगे।"
बता दें कि ‘पूर्वी तुर्किस्तान’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर चीन में झिंजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के रूप में जाने जाने वाले क्षेत्र के लिए किया जाता है। ये इलाका मुख्य रूप से उइगर लोगों, एक तुर्क-भाषी मुस्लिम जातीय समूह, साथ ही कज़ाख, किर्गिज़ और ताजिक जैसे अन्य अल्पसंख्यक बहुल है। भौगोलिक रूप से चीन के सुदूर पश्चिम में स्थित, झिंजियांग प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जो कई मध्य एशियाई देशों के साथ-साथ अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करता है।
झिंजियांग पर चीनी सरकार के औपचारिक नियंत्रण की स्थापना के बाद से, उइगर आबादी अक्सर अपनी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक प्रथाओं और राजनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए संघर्ष करती रही है। कई उइगर इस क्षेत्र को अपनी मातृभूमि मानते हैं। वो सालों से स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर चीनी सरकार और उइगर अलगाववादी आंदोलनों के बीच तनाव बढ़ गया है, खास तौर पर समुदाय के खुद के फैसलों में, उइगर संस्कृति और धर्म के संरक्षण को लेकर।
14 सितंबर, 2004 को, बढ़ते दमन के जवाब में, वाशिंगटन, डीसी में निर्वासित पूर्वी तुर्किस्तान सरकार की स्थापना की गई थी। अनवर यूसुफ तुरानी के नेतृत्व में निर्वासित इस सरकार ने विश्व स्तर पर उइगर लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करने की मांग की, पूर्वी तुर्किस्तान को एक स्वतंत्र या स्वायत्त रूप से शासित क्षेत्र के रूप में मान्यता देने की वकालत की। इस निर्वासित सरकार का गठन एक प्रतीकात्मक कार्य था, जो इस क्षेत्र में चीन की नीतियों के प्रति दुनिया भर के उइगरों के बीच गहरे असंतोष को दर्शाता है, साथ ही राजनीतिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता के लिए उनके चल रहे संघर्ष को भी दर्शाता है।
Published on:
18 Nov 2024 03:38 pm
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