GULF DISPUTE : जानिए, तेल संपन्न कतर पर खाड़ी देशों ने क्यों लगाए थे प्रतिबंध

-तीन वर्ष बाद सऊदी अरब कतर के लिए समुद्री मार्ग खोलने वाला पहला देश

By: pushpesh

Updated: 12 Jan 2021, 12:22 AM IST

सऊदी अरब ने कतर के साथ जमीन, हवा और समुद्री सीमा फिर से खोल दी। वर्ष 2017 में भूराजनीतिक विवाद के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और मिस्र ने कतर के साथ राजनयिक और परिवहन संबंधों को खत्म कर लिया था। इस विवाद ने ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र को भी विभाजित कर दिया। कतर पर अल कायदा और आइएस को समर्थन का भी आरोप लगते रहे हैं।

विवाद कैसे शुरू हुआ?
2017 में हैकर्स ने कतर की समाचार एजेंसी पर खबर जारी कर दी कि कतर के अमीर तमीम बिन अल थानी ने डॉनल्ड ट्रंप की यात्रा के बाद क्षेत्र में पैदा हुई ईरान विरोधी भावना की आलोचना की है। हालांकि कतर के अधिकारियों ने इस पोस्ट को हटा दिया। सऊदी और यूएई ने कतर पर आरोप लगाया कि वह ईरान को अलग करने के प्रयासों को रोक रहा है। इससे पहले 2014 में ऐसे ही विवाद के चलते कतर ने झुकने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उस पर कठोर प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

क्यों खत्म हो रहा है तेल संपन्न खाड़ी देशों का वर्चस्व

विभाजन की लकीर
कतर और उसके पड़ोसी देशों में गैस की प्रतिद्वंद्विता फारस की खाड़ी से आगे बढ़ गई। लीबिया में छद्म युद्ध ने विभाजन की इस लकीर को और बढ़ा दिया। प्रतिबंध की शुरुआत में मदद करने पर तुर्की, कतर के करीब आ गया। इससे दूसरे खाड़ी देशों के साथ तुर्की के संबंधों में खटास आ गई। जैसे, तुर्की ने लीबिया में यूएई समर्थित बलों के खिलाफ लड़ाई में अपनी सेना भेजी और 2018 में इस्तांबुल में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सऊदी एजेंटों को फंसाने वाली सूचना दी।

प्रतिबंध के बाद जल्द संभल गया कतर
दुनिया के सबसे धनी देशों में शामिल कतर ने अपनी अर्थव्यवस्था को लचीला बना लिया है। सऊदी अरब ने समुद्री मार्ग बंद कर कतर को झटका दिया, लेकिन उसने छोटे शिपिंग कॉरिडोर खोल लिए, जिससे गैस और तेल की बिक्री निर्बाध जारी है। फिर जल्द ही कतर ने भारत, तुर्की और ईरान सहित अन्य देशों में अपना व्यापार बढ़ा लिया।

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नुकसान सभी को
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक 2016 में बहिष्कार से पहले यूएई के साथ कतर का व्यापार 350 करोड़ डॉलर था, जबकि कतर, सऊदी अरब और मिस्र के बीच कुल 330 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ था, जो लगभग खत्म हो गया। अंतर खाड़ी देशों के कारोबार में गिरावट से रियल एस्टेट सेक्टर में भारी मंदी आ गई। हालंाकि नुकसान प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भी उठाना पड़ा। खासकर यूएई को, जिसने कतर से निवेश के साथ ही सैलानियों को भी खो दिया।

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