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What is IPEF : चीन केंद्रित सप्लाई चैन का विकल्प बनेंगे भारत, अमरीका समेत 13 देश

हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दबंगई और दुनिया की सप्लाई-चैन श्रृंखला का केंद्र बन बैठे चीन की चौधराहट से पूरी दुनिया में चिंता है। चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत विशेषकर अमरीका के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। इसलिए अब अमरीका ने एशिया के इस क्षेत्र यानी हिंद प्रशांत सागर पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में जापान में क्वाड सम्मेलन के दौरान अमरीका के नेतृत्व में एक नई आर्थिक व्यवस्था इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) की आधारशिला रखी गई।

जयपुर

Published: May 24, 2022 09:23:45 am

हिंद प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ( US President Joe Biden) द्वारा प्रस्तावित नई आर्थिक व्यवस्था इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (Indo Pacific Economic Framework ) (आईपीईएफ) का भारत भी संस्थपाक सदस्य बन गया है। इस नए मंच (What is the purpose of Indo Pacific Economic Framework for Prosperity) का उद्देश्य एकीकृत, उन्नतशील और क्लीन अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से क्षेत्र में एक नया प्रभावक्षेत्र बनाना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सभी हिंद प्रशांत देशों के साथ एक समावेश और लचीले आईपीईएफ के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने ये भी कहा कि इस फ्रेमवर्क का मुख्य फोकस एरिया गतिशील आपूर्ति श्रृंखला की ओर आगे बढ़ना है, जिससे अर्थव्यवस्था के केंद्रीय पक्षों में चीन का विकल्प उपलब्ध हो सके, की आधारशिला 3T यानी ट्रांसपैरेंसी, ट्रस्ट और टाइमलीनेस यानी विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्धता पर आधारित होना चाहिए।
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हम 21 वीं सदी की अर्थव्यवस्था के लिए नए नियम लिख रहे: Joe Biden

इससे पूर्व अमरीकी के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) की शुरुआत करते हुए अपने उद्धाटन वक्तव्य में कहा कि
हम 21 वीं सदी की अर्थव्यवस्था के लिए नए नियम लिख रहे हैं। इंडो-पैसिफिक के लिए हमारा विजन स्वतंत्र और मुक्त होने के साथ सुरक्षित और लचीला हो, जहां आर्थिक विकास टिकाऊ और समावेशी हो। हम अपने सभी भागीदार देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से और निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े, इसके लिए यहां आगे आए हैं।
बता दें व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में कहा गया है कि, आईपीईएफ संयुक्त राज्य अमरीका और उसके सहयोगियों को नियम आधारित ऐसा मार्ग उपलब्ध कराएंगे जिससे अमरीका के छोटे श्रमिक, छोटे व्यवसायी और किसान इंडो पैसिफिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
अमरीकी के साथ ये 12 देश आए आगे, दुनिया की 40 प्रतिशत है GDP

इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) के आरंभिक भागीदारों देशों के रूप में अमरीकी के साथ 12 देशों ने इस पर आगे बढ़ने की सहमति जताई है। अमरीका के साथ ये 12 देश हैं - ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया गणराज्य, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम। गौर करने की बात ये है कि , जैसा कि व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में भी रेखांकित किया गया है कि ये 12 देश आज विश्व सकल घरेलू उत्पाद के 40% का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसा की बार बार रेखांकित किया गया है कि इसका मकसद आपूर्ति शृंखला की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना और सहयोग बढ़ाना है।
आखिर क्यों जरूरी हुआ IPEF

कोरोना काल में चीन से आपूर्ति बाधित हुई और कई देशों को खामियाजा भुगतना पड़ा। यही वजह है कि पूरी दुनिया ठोस विकल्प चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला की आज की मुख्य जरूरत है। जैसा कि पीएम मोदी के वक्तव्य से रेखांकित किया गया है कि इस करार से अमरीकी और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति शृंखला, डिजिटल व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा समेत कई मुद्दों पर साथ काम करेंगी। कहा जा रहा कि इस समूह से जुड़े देशों के बीच परस्पर टैरिफ की दरें कम होंगी। हालांकि अब इसका पूरा ब्योरा आना शेष है कि इससे कैसे ये देश एक दूसरे से लाभान्वित होंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे सदस्य देशों में आर्थिक गठजोड़ मजबूत होगा।
मुझे पत्थर पर लकीर खींचने में मजा आता है: मोदी

इससे पूर्व भारत के प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने जापान में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में आज सही मायनों में जनता के नेतृत्व वाली सरकार काम कर रही है। मेरा जो लालन-पालन हुआ है, जो संस्कार मुझे मिले हैं, उसके कारण मेरी भी एक आदत बन गई है। मुझे मक्खन पर लकीर खींचने में मजा नहीं आता। मैं पत्थर पर लकीर खींचता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा-सवाल मोदी का नहीं है, मुद्दा 130 करोड़ देशवासियों के संकल्प-सपने और सामर्थ्य का है। पीएम मोदी ने कहा कि नया भारत भविष्य को लेकर काफी आशावान है।

अमरीका की रणनीति उकसाने वाली : चीन

इस पूरे घटनाक्रम और विशेषकर अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के ताइवान को लेकर दिए गए बयान पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बाइडेन ने कहा था कि वे ताइवान पर हमले के स्थिति में उसमें सैन्य हस्तक्षेप करेंगे। वांग यी ने कहा कि अमरीका की हिंद-प्रशांत रणनीति विभाजन पैदा करती है, टकराव के लिए उकसाती है और शांति भंग करती है। इसका मकसद स़िर्फ एशिया-प्रशांत क्षेत्र का नाम मिटाना है। वांग ने कि अमरीकी राष्ट्रपति असफल होंगे।

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