सुनामी बनकर क्यों विनाशकारी हो जाती हैं समुद्र की लहरें

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN) सुनामी (tsunami) के प्रति जागरूक करने के लिए 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस (World Tsunami Awareness Day) मनाती है। 2004 में हिंद महासागर के तटीय देशों और 2011 में जापान में आई सुनामी (japan tsunami) इस सदी की सबसे भीषण घटना थी।

Pushpesh Sharma

November, 1008:11 PM

विश्व

जयपुर.

भूकंप या अन्य भूगर्भीय हलचल, जैसे टेक्टोनिक प्लेट्स के खिसकने के बाद सैकड़ों फीट ऊपर तक उठने वाली पानी की विशाल लहरें ही सुनामी हैं, जो आबादी क्षेत्र में बड़े विनाश का कारण बन जाती हैं। सबसे ज्यादा नुकसान तटीय इलाकों में होता हैं। प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर के भीतर 80 फीसदी क्षेत्र भूगर्भीय हलचलों वाला क्षेत्र है, जहां भूगर्भीय बदलाव और ज्वालामुखी-भूकंप आते रहते हैं। सुनामी पूरे उफान पर हो तो 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से समुद्र से बाहर आ सकती है यानी एक जेट विमान की गति से।

सुनामी के दौरान लंबी तरंग दैध्र्य का सिद्धांत देखने में आता है, जिससे रास्ते में उसकी ताकत कम नहीं होती। इस हिसाब से ये लहरें प्रशांत महासागर के विस्तार को एक घंटे से भी कम दूरी पर पार कर सकती हैं।

बचाव : कंपन या पानी में असामान्य हलचल से सुनामी का अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए सुनामी तंत्र से संकेत मिलते ही स्थान छोडऩा चाहिए। समुद्र के पानी का पीछे हटना भी सुनामी का संकेत है। क्योंकि लहर के ऊपरी भाग का विशाल पानी आमतौर पर पांच मिनट या कुछ अधिक में तट से टकराता है। घटना को पहचानकर जान बचाई जा सकती है।

pushpesh
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned