scriptWhy Myanmar’s Suu Kyi sentenced to four years in jail | क्यों मिली म्यांमार की अपदस्थ नेता आंग सान सू को चार साल की सजा? | Patrika News

क्यों मिली म्यांमार की अपदस्थ नेता आंग सान सू को चार साल की सजा?

म्यांमार की सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि आंग सान सू की को सोमवार कोरोना नियमों का उल्लंघन करने और सेना के खिलाफ असंतोष भड़काने का दोषी पाया गया है और चार साल की सजा सुनाई गई है।

नई दिल्ली

Published: December 06, 2021 03:35:18 pm

म्यांमार की एक अदालत ने देश की अपदस्थ नेता आंग सान सू की को चार साल जेल की सजा सुनाई है। इस बात की जानकारी स्वयं म्यांमार की सेना ने दिया है। इस सजा के खिलाफ सू के समर्थकों में गुस्सा है और वो इसे सू के राजनीतिक करियर को खत्म करने की साजिश बता रहे हैं। वहीं ब्रिटेन ने सू की के खिलाफ सजा की निंदा की है।
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सजा क्यों सुनाई गई?
म्यांमार की सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि आंग सान सू की को सोमवार कोरोना नियमों का उल्लंघन करने और सेना के खिलाफ असंतोष भड़काने का दोषी पाया गया है।

मेजर जनरल ज़ॉ मिन टुन (Zaw Min Tun) ने कहा कि 'उसे दोनों आरोपों में दो-दो साल की जेल हुई है।
पूर्व राष्ट्रपति विन मिंट (Win Myint) को भी इसी आरोप में चार साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, इन दोनों नेताओं को अभी जेल नहीं ले जाया जाएगा।' आगे जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 'वे उन स्थानों से भी आरोपों का सामना करेंगे जहां वो अभी रह रहे हैं।'
मीडिया को नेपीडॉ में इस मामले की कर्रवाई में शामिल होने से रोक दिया गया। सेना ने भी आंग सान सू की के वकीलों को मीडिया और जनता के साथ संवाद करने से मना कर दिया है।
आंग सान सू पर हैं कई आरोप

आंग सान सू की पर भ्रष्टाचार, आधिकारिक गुप अधिनियम उल्लंघन, दूरसंचार कानून और कोविद नियमों के उल्लंघन के सहित कुल 11 आरोप लगे हैं। सू की ने भी सेना द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।
आंग सांग सू के खिलाफ इन आरोपों को उन्हें बदनाम करने और म्यांमार में अगला चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश के रूप में देखा जाता है। सू के समर्थकों का दावा है कि जानबूझकर ये मामले बनाए गये और उन्हें फँसाय गया है ताकि जो तख्तापलट हुआ है उसे उचित ठहराया जा सके।
पिछले वर्ष नवंबर माह में आंग संग सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी, जबकि उस दल को हार मिली जो सेना के नियंत्रण में था। इस हार के बाद सेना ने मतदान में धांधली के आरोप लगाए थे, परंतु जांच में ये आरोप निराधार साबित हुए।
सेना के एक्शन में गई 1300 नागरिकों की जान

सेना ने लोकतंत्र को खत्म कर इसी वर्ष 1 फरवरी को तख्तापलट कर दिया और देश की कमान अपने हाथ ले ली। इसके साथ ही आंग सान सू और उनकी पार्टी के कई नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया और कई मामले दर्ज कर कार्रवाई शुरू करवा दी।
तख्तापलट के खिलाफ जब आम नागरिकों ने विरोध किया तो सेना ने बल प्रयोग कर उनकी आवाज दबाने के प्रयास किए। म्यांमार की सेना द्वारा बल प्रयोग में अब तक 1300 लोग मारे जा चुके हैं जबकि हजारों को गिरफ्तार किया गया है।

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