क्या अर्जेंटीना को आर्थिक संकट से उबार पाएंगे फर्नांडीज?

पूर्व राष्ट्रपति मॉरिसियो मैक्री (mauricio macri) के कार्यकाल में अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था (Argentina Economy) काफी कमजोर हुई। मुद्रास्फीति (inflation) और बेरोजगारी दर बढ़ गई। विकास कार्यों की गति थम गई और भ्रष्टाचार (corruption) के मामले बढ़ गए। इसमें पूर्ववर्ती सरकारें भी शामिल रहीं।

Pushpesh Sharma

November, 1007:50 PM

विश्व

जयपुर.

अर्जेंटीना में राष्ट्रपति पद के चुनाव में अल्बर्टो फर्नांडीज की जीत से दक्षिणपंथी विचारों पर वामपंथ की लोकलुभावन वापसी हुई है। लेकिन फर्नांडीज ऐसे समय अर्जेंटीना की सत्ता के लिए चुने गए हैं, जब देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। निवर्तमान राष्ट्रपति मॉरिसियो मैक्री के कार्यकाल में अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था 3.4 फीसदी तक गिर गई। मुद्रास्फीति की दर 50 फीसदी से अधिक और बेरोजगारी दर 10 फीसदी हो गई है। इसके अलावा एक तिहाई आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा रिकॉर्ड 56 बिलियन डॉलर ऋण के बावजूद अर्जेंटीना पर ऋण डिफॉल्टर होने की आशंका है, जो यहां के सकल घरेलू उत्पाद का 90 फीसदी से अधिक है। लेफ्ट की जीत के साथ ही मैक्री की पूर्ववर्ती राष्ट्रपति क्रिस्टीना क्रिश्नर फिर सत्ता में वापसी कर रही हैं। हालांकि इस बार वे फर्नांडीज की सरकार में उपराष्ट्रपति बनने जा रही हैं। क्रिस्टीना के शासन में महंगाई दर बढ़ गई, अस्थिर विकास, अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में पकड़ कमजोर हुई, काला बाजारी बढ़ी और कई घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया। क्रिस्टीना को भ्रष्टाचार के 11 मामलों में आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

जीत का अंतर दर्शाता है हताशा
फर्नांडीज की जीत का कम मार्जिन देश की अशांत राजनीति और कट्टरपंथी वादों के कारण मतदाताओं की हताशा दर्शाता है। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाकर स्थिति को और कठिन बना दिया। अर्थव्यवस्था को बचाने की मैक्री की नाकाम कोशिश के कारण उन्हें 40 फीसदी वोट जरूर मिले। फर्नांडीज के पास देश की गंभीर आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए चुनौतियां हैं, लेकिन उन्होंने जनता से वादा किया है कि वे इस संकट से उबारने में सफल होंगे।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने की चुनौती
अल्बर्टो फर्नांडीज पर देश एक बार भरोसा कर सकता है, लेकिन उनकी उपराष्ट्रपति क्रिस्टीना और उनके समर्थकों पर उनको निगाह रखनी होगी, जिन्होंने उपभोक्ता सब्सिडी में घालमेल किया। फर्नांडीज के लिए लैटिन अमरीकी वामपंथियों के साथ सामान्य व्यवहार सहज होगा, लेकिन ब्राजील या यूरोपीय संघ के साथ संतुलन कठिन। उन्हें मतदाताओं के वादों पर खरा उतरना होगा, अन्यथा जनता फिर छली जाएगी।

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