मजदूर और बेघर लोगों को होटल में रखा जा रहा है, फूड बैंक से आता है खाना

-कैलिफोर्निया प्रांत में करीब 40 हजार होटल्स के कमरे बुक किए हैं
-न्यूयॉर्क से तीन गुना बड़ा है कैलिफोर्निया, फिर भी मौत और संक्रमण का आकंड़ा काफी कम
-सैन फ्रांसिस्को से पत्रिका के लिए विवेक गुप्ता की रिपोर्ट-

By: pushpesh

Published: 04 May 2020, 12:27 AM IST

सैन फ्रांसिस्को. कैलिफोर्निया में 8 मार्च से लॉकडाउन है, जो मई के पहले सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है। यहां न्यूयॉर्क से उलट हालात नियंत्रण में हैं। प्रांत में अब तक एक हजार के करीब लोगों की संक्रमण से जान गई है तो न्यूयॉर्क में यह आंकड़ा 13 हजार को पार कर गया। जबकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क से लगभग तीन गुना बड़ा है। वैसे तो सबकुछ लगभग वैसा ही है, जैसा अन्य देशों में लॉकडाउन के दौरान होता है। लेकिन कुछ अच्छी बातें भी देखने को मिली। जैसे श्रमिकों और बेसहारा लोगों के लिए प्रांतीय सरकार ने होटल्स बुक करवा दिए, ताकि उन्हें भटकना ना पड़े। इसके लिए सरकार ने कई बड़े होटल और मोटेल ग्रुप से दो माह के लिए टाइअप किया है।

सैन फ्रांसिस्को में भी 10 हजार जबकि पूरे कैलिफोर्निया में 40 हजार के करीब होटल्स के कमरे बुक किए गए हैं, जिनमें 4300 बेघर लोगों को ठहराया गया है, ताकि इन्हें परेशानी भी न हो और वायरस के संचरण को भी रोका जा सके। इसके लिए डॉक्टर या नर्सेज, जो घर नहीं जाना चाह रहे, उनके लिए भी होटल बुक किए गए हैं। कई होटल्स ने खुद ही ये प्रस्ताव सरकार को भेजे हैं।

फूड बैंक :

फूड बैंक में कोई भी फ्री खाना ले सकता है। इसके लिए कई कंपनियां डोनेशन दे रही हैं। कुछ बड़ी कंपनियों खाना और खाद्य सामग्री खरीदकर उनके पैकेट बनाते हैं और उन्हें सप्लाई करते हैं। ये पैकिंग इस तरह की जाती है कि खाना एक सप्ताह 10 दिन तक चल जाता है। इसमें ड्राइ फ्रूट्स, मिल्क, मीट या ड्राइ बे्रड आदि। जो होमलेस लोग हैं, उन्हें भी फूड बैंक से खाना सीधा जाता है, जहां उनको ठहराया गया है। जो लोग अकेले हैं या खाने में असमर्थ हैं, वे भी यहां से खाना ले सकते हैं।

जांच में आई गति :

शुरू में जांच किट कम थे, लिहाजा उन्हीं की जांच हो रही थी, जिनमें ज्यादा लक्षण पाए गए। हर शहर में एक जांच केंद्र बना दिए गए। हालांकि अब जांच अधिक हो रही हैं और रिजल्ट भी दो-तीन घंटे में आ जाता है, जो पहले 10 दिन से पहले नहीं आता था।
इस सत्र के लिए स्कूल बंद : यहां जून तक स्कूलों का सेशन होता है और अगला सत्र सितंबर से शुरू होता है। सरकार ने स्कूलों को इस सत्र के लिए बंद करवा दिया है और सभी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है।

भूले बिसरे रिश्ते फिर ताजा :

यहां की वर्क कल्चर ऐसी है कि लोग परिवार या दोस्तों को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं। लॉकडाउन के बाद लोग परिवार के साथ तो समय बिता ही रहे हैं, साथ ही उन लोगों से भी वीडिया या ऑडियो कॉल के जरिए जुड़ रहे हैं, जिनसे वर्षों से बात नहीं हो पा रही थी।

कुछ और भी...
-कुछ कंपनियां मास्क और जरूरी उपकरण डोनेट कर रही हैं तो कुछ कंपनियां पैसे दान कर रहे हैं।
-बिजली, पानी के बिल या किश्तों में बिना ब्याज दो-तीन माह की छूट दी जा रही है।
-ग्रोसरी स्टोर्स पर वरिष्ठ नागरिक, पुलिस, फायर फाइटर और सफाईकर्मियों को प्राथमिकता दी जाती है।
-अनावश्यक घूमते पकड़े गए तो एक हजार डॉलर (करीब 75 हजार रुपए) का जुर्माना देना पड़ता है।
-ग्रोसरी स्टोर्स, दवा की दुकानें, बैंक, पेट्रोल पंप और खाना डिलीवर करने वाले रेस्टॉरेंट खुले हैं।

(रिपोर्ट : पुष्पेश शर्मा)

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