इस दीपावली करे ये खास पूजा, मिलेगा पूरे एक साल अपार धन

इस दीपावली करे ये खास पूजा, मिलेगा पूरे एक साल अपार धन

Tanvi Sharma | Publish: Sep, 12 2018 04:31:37 PM (IST) पूजा

इस दीपावली करे ये खास पूजा, मिलेगा पूरे एक साल अपार धन

हिंदू धर्म में दीपावली के त्यौहार का बहुत महत्व माना जाता है। इस साल Diwali 2018 दीपावली का त्यौहार 7 नवंबर को मनाया जाएगा। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घरों में विशेष पूजा की जाती है। इस पूजा को करने से दरिद्रता का नाश होता है और इससे घर में कभी पैसों की कमी नहीं आती। कहा जाता है की इस पूजा को करने वाले व्यक्ति को सभी कामों में उसे सफलता प्राप्त होती है। कार्यों में आने वाली सभी रुकावटें खत्म हो जाती है। लेकिन यह विशेष पूजा गणेश-लक्ष्मी की पूजा के बाद रात में विशेष समय में की जाती है। अमावस की कालिमा देवी काली का स्वरूप है। यह तमोगुणमयी रात होती है। इसलिए इस रात देवी कली की भी पूजा होती है। कई स्थानों पर तो विशेष पूजा पंडाल बनाकर इस रात देवी काली की पूजा होती है। काली, लक्ष्मी और सरस्वती तीनों ही महालक्ष्मी से उत्पन्न हुई हैं। यही कारण है कि दीपावली में शुभ लाभ की चाहत रखने वालों को महालक्ष्मी की प्रसन्न हेतु तीनों देवियों काली, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए।

 

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पैसों की कमी दूर करने के लिए दिपावली के दिन करें ये विशेष पूजा

दीपावली के इस पावन पर्व पर धनदा यक्षिणी के माध्यम से आप कई बदलाव ला सकते हैं। यंत्रशास्त्र, शक्ति पुराण और श्री महालक्ष्मी उपास्य के धर्मग्रंथों में धनदा यक्षिणी का उल्लेख किया जाता है। वास्तव में यक्षिणी श्री महालक्ष्मी के ही अधीन हैं। शास्त्रों में 108 यक्षिणी के नाम निहित हैं, जिसमें धनदा यक्षिणी सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

'धनदा यक्षिणी' की साधना दीपावली के दिन श्री गणेश, लक्ष्मी, कुबेर आदि का पूजन संपन्न करने के बाद रात्रि दस बजे के बाद प्रारंभ की जाती है। इसके लिए पीला आसन, पीली धोती, पीला दुपट्टा धारण करें। इस साधना में कोई सिला हुआ वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए। आसन ग्रहण कर किसी भी तेल का दीपक और सुगंधित धूपबत्ती प्रज्जवलित कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें। किसी ताम्र, रजत, स्वर्ण पात्र अथवा कमल पुष्प के पत्ते पर हल्दी, सिंदूर और चमेली के तेल का मिश्रण कर स्याही तैयार करें और अनार की कलम से धनदा यक्षिणी यंत्र बनाएं। यंत्र तैयार करते समय 'ऊं महालक्ष्मियायै नम:' मंत्र का मानसिक जाप करते रहें। एक थाली में सिंदूर से अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से 'श्री' लिख कर थाली को पीले पुष्पों से भर कर चौकी पर पीला वस्त्र बिछा कर रखें। इसके बाद यंत्र को दोनों हाथों में लेकर 'ऊं भू: भुव: स्व: श्री धनदा यक्षिणी इहागच्छ इहतिष्ठ श्री धनदा यक्षिणी मावाहयामि स्थापयामि नम:' मंत्र का उच्चारण कर थाली के फूलों के ऊपर स्थापित करें। यंत्र का पूजन गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, ताम्बूल आदि अर्पित कर करें।

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