राधाष्टमी 2018: इस विधि से करें व्रत, मिलेगा महालक्ष्मी और सरस्वती का आशीर्वाद

राधाष्टमी 2018: इस विधि से करें व्रत, मिलेगा महालक्ष्मी और सरस्वती का आशीर्वाद

Tanvi Sharma | Publish: Sep, 16 2018 04:05:09 PM (IST) पूजा

राधाष्टमी 2018: इस विधि से करें व्रत, मिलेगा महालक्ष्मी और सरस्वती का आशीर्वाद

हर वर्ष भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी पर्व मनाया जाता है। इस दिन राधाजी का जन्म हुआ था, इसलिए यह बहुत ही खास माना जाता है। खातौर पर उनके लिए जोकी राधा-कृष्ण के भक्त होते हैं। इस साल यह पर्व 17 सितंबर 2018, सोमवार को मनाया जाएगा। राधा जी के कारण ही श्री कृष्ण रासेश्वर कहलाते हैं। राधा के बिना श्रीकृष्ण अधूरे हैं।

इस विधि से करें राधाष्टमी व्रत

राधाष्टमी के दिन राधाजी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराते हैं स्नान कराने के बाद उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद राधा जी की सोने या किसी अन्य धातु से बनी हुई सुंदर मूर्ति को विग्रह में स्थापित करते हैं। इस दिन मंदिरों में 27 पेड़ों की पत्तियों और 27 ही कुंओं का जल इकठ्ठा करना चाहिए। इस विधि से जो भक्त पूजा करते हैं वह सभी पापों से मुक्ति पाते हैं।

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श्री राधाष्टमी व्रत का पुण्यफल

कहा जाता है की जिनके इष्टदेव राधा-कृष्ण होते हैं, उन्हें राधाष्टमी का व्रत जरुर करना चाहिए। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार राधआष्टमी का व्रत करना बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है। श्री राधाजी को सर्वतीर्थमयी और ऐश्वर्यमयी हैं। इस व्रत को करने वाले भक्तों के घर हमेशा धन का अंबार लगा रहता है। क्योंकि राधा जी को लक्ष्मीजी का रुप माना जाता है। जो भी व्यक्ति यह व्रत करते हैं उनकिी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। मनुष्य को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन राधाजी से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। अर्थार्थी को धन की प्राप्ति होती है, मोक्षार्थी को मोक्ष मिलता है। राधाजी की पूजा के बिना श्रीकृष्ण जी की पूजा अधूरी रहती है।

कथा के अनुसार

श्रीकृष्ण भक्ति के अवतार देवर्षि नारद ने एक बार भगवान सदाशिव के श्री चरणों में प्रणाम करके पूछा कि श्री राधा देवी लक्ष्मी, देवपत्नी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंतरंग विद्या, वैष्णवी प्रकृति, वेदकन्या, मुनिकन्या आदि में से कौन हैं?
इस प्रश्न के उत्तर में भगवान ने कहा कि किसी एक की बात क्या कहें, कोटि-कोटि महालक्ष्मी भी उनके चरणकमलों की शोभा के सामने नहीं ठहर सकतीं, इसलिए श्री राधाजी के रूप, गुण और सुन्दरता का वर्णन किसी एक मुख से करने में तीनों लोकों में भी कोई सामर्थ्य नहीं रखता। उनकी रूपमाधुरी जगत को मोहने वाले श्रीकृष्ण को भी मोहित करने वाली है इसी कारण अनंत मुख से भी मैं उनका वर्णन नहीं कर सकता। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन श्री राधाजी के श्री चरणों के दर्शन होते हैं। उनके चरणकमलों की सुंदरता का वर्णन कर पाना भी किसी के लिए संंभव नहीं है।

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