तीर्थ स्नान व दान का पूण्य पाने के लिए करें उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें महत्व

तीर्थ स्नान व दान का पूण्य पाने के लिए करें उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें महत्व

Tanvi Sharma | Publish: Nov, 29 2018 05:53:19 PM (IST) | Updated: Nov, 29 2018 05:53:20 PM (IST) पूजा

तीर्थ स्नान व दान का पूण्य पाने के लिए करें उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें महत्व

हिंदू धर्म में हर साल कुल 24 से 26 एकादशी आती हैं। हर एकादशी का अपना अलग विशेष महत्व होता है। हर माह आने वाली एकादशी में मार्गशीर्ष एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। मार्गशीर्ष मास के कष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी व्रत 3 दिसंबर को रखा जाएगा। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्री विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। शास्त्रों में माना जाता है की उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्रती को अश्वमेघ यज्ञों, कठिन तपस्या, तीर्थ स्नान व दान का फल प्राप्त होता है। इसलिए व्रत का अत्यधिक महत्व माना जाता है। एकादशी तिथि 2 दिसंबर 2018 दोपहर 2 बजे से प्रारंभ हो जाएगी और 3 दिसंबर 2018 को 12:59 बजे समाप्त हो जाएगी।

utpanna ekadashi

उत्पन्ना एकादशी के दिन जन्मी थीं ये देवी

मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी के दिन देवी का जन्म हुआ था। इन देवी का जन्म भगवान विष्णु से हुआ था, शायद यह बात बहुत ही कम लोग जानते होंगे। यही कारण है की इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इसी दिन से एकादशी व्रत शुरु हुआ था। उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि एकादशी के व्रत की तैयारी दशमी तिथि और उपवास दशमी की रात्रि से ही आरंभ हो जाता है। उत्पन्ना एकादशी की दशमी तिथि को शाम के समय भोजन करना चाहिए फिर रात्रि में भोजन न करने का विधान है। इसके लिए रात्रि में व्रत उपवास करें। साथ ही इस एकादशी पर साफ-सफाई का विशेष महत्व है। साथ ही व्रती को बुरी संगत से दूर रहना चाहिए।

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