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एक Click में जानें लखनऊ मेट्रो की खासियत, कैसी है अपनी Metro Train

Updated: IST lucknow metro
आइये आपको बताते हैं की आखिर अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की क्या खासियत है?

लखनऊ.सीएम अखिलेश यादव ने गुरुवार को मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अब जल्द ही मेट्रो लखनऊ की शान बनेगा। आइये आपको बताते हैं की आखिर अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की क्या खासियत है? आपको जानकार यह ख़ुशी होगी की लखनऊ मेट्रो का काम बेहद कम समय में हुआ जिससे इसने देश में एक कीर्तिमान बनाया है।

- मेट्रो मार्च 2017 तक चलेगी

-लखनऊ मेट्रो को बनाने में 4 हज़ार मजदूर, 790 दिन और 2 करोड़ 53 लाभ 16 हज़ार रुपए रोज़ाना खर्च हुआ है

-लखनऊ मेट्रो के चीफ एडवाइज़र ई श्रीधरन ने बताया की लखनऊ मेट्रो 2 साल 2 महीने में बनकर तैयार हुई

-दिल्ली मेट्रो को सरकार ने 10 साल का समय दिया था, लेकिन मेट्रो की शुरुआत 7 साल लगा दिए

-2 हज़ार करोड़ की लागत से बना साढ़े 8 किमी का ट्रैक

-साढ़े 8 किमी के फेज़ 1(ए) में ये हैं 8 स्टेशन

250 करोड़ रुपए से हुई शुरुआत

मार्च 2013 में मैट्रो डीपीआर और दूसरी तैयारियों के लिए बजट में 250 करोड़ रुपए सरकार ने मंजूर किया था। अगस्त 2013 में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के डीपीआर को यूपी सरकार ने अप्रूव्ड किया। दिसंबर 2013 को डीपीआर के पार्ट 1 को सैद्धान्तिक सहमति सरकार से मिली और 22 अगस्त 2014 को मेट्रो के काम को कैबिनेट की मजूरी मिली। लखनऊ मेट्रो का काम 27 अगस्त 2014 को शुरू हुआ।

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लखनऊ मैट्रो के यह हैं पांच की पर्सन

आलोक रंजन- जब आलोक रंजन मुख्य सचिव थे तब मेट्रो के काम की शुरुआत हुई

ई श्रीधरन- श्री धरन लखनऊ मेट्रो के चीफ एडवाइज़र हैं जिनके डायरेक्शन में मेट्रो टीम ने काम किया

कुमार केशव- श्रीधरन टीम के कुमार केशव लखनऊ मेट्रो में मैनेजिंग एडिटर हैं। उनकी अगुवाई में ही लखनऊ मेट्रो तय समय से शुरु हुआ

दलजीत सिंह- दलजीत सिंह कुमार केशव की टीम के इम्पोर्टेन्ट मेम्बर हैं वह वर्क्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डायरेक्टर हैं

महेन्द्र सिंह-महेन्द्र सिंह रोलिंग स्टॉक डायरेक्टर हैं इनकी देख रेख में मेट्रो के कोच बनें

मेट्रो में बैठ सकेंगे 1574 पैसेंजर्स

शुरुआत में मेट्रो में केवल चार कोच होंगे, इसके बाद भीड़ देखते हुए छह कोच लगाए जा सकेंगे। ट्रेन में कुल 1574 यात्री बैठ सकेंगे।

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मेट्रो के कोच की खाशियत

कोच बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है की इससे लखनऊ का कल्चर पता चल सके। मेट्रो का लोगो इमामबाड़ा और रूमी गेट की तरह डिजाइन किया गया है। हर कोच में एक तरफ चिकनकारी को दर्शाया गया है जो लखनऊ की पहचान है। कोच के अंदर की छत को सफ़ेद रंग से रंगा गया है। सभी कोच में एलईडी लाइट लगी है। कोच में डेस्टिनेशन बताने वाला बोर्ड लगा है। इससे यात्रियों को पता चल सकेगा की उनका स्टेशन अब कितनी दूर है? हर कोच में रेड कलर के ग्रैब हैंडल लगे हैं। इसको पकड़कर लोग खड़े हो सकेंगे। हर कोच में फोन चार्ज करने के लिए 18 प्वाइंट बनाए गए हैं। मेट्रो ट्रेन हर स्टेशन में 20 सेकंड रुकेगी। ट्रेन ख़राब होने पर रिज़र्व रहेगी। सबसे ख़ास बात है की मेट्रो का टिकट बिना लाइन लगाकर मिलने वाला है। इमरजेंसी बटन दबाकर मेट्रो ट्रेन रोक सकेंगे।

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दिव्यांगों के लिए स्पेशल सुविधा

लखनऊ मेट्रो में दिव्यांगों के लिए स्पेशल कोच लगे हैं। इसमें कोच के आगे और पीछे दो स्पेशल स्पेस है। कोच में दिव्यांगों के लिए स्पेशल मार्क होगा। कोच में एक रिक्वेस्ट बटन होगा। इस बटन को दबाने से ड्राइवर को पता चल जाएगा की दिव्यांग कोच के अंदर पहुंच चुके हैं।दिव्यांग रिक्वेस्ट बटन दबाकर उतर भी सकेंगे।

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