पर्युषण पर्व : भगवान महावीर का जन्मवाचन, त्रिशला नंदन के जयकारों से गूंजा मंदिर

पर्युषण पर्व : भगवान महावीर का जन्मवाचन, त्रिशला नंदन के जयकारों से गूंजा मंदिर

Lalit Saxena | Publish: Sep, 10 2018 07:30:04 PM (IST) Agar Malwa, Madhya Pradesh, India

जन्मोत्सव पर समाजजनों ने दी बधाई

आगर-मालवा. पर्युषण महापर्व के अंतर्गत धार्मिक महोत्सव का सिलसिला जारी है। सोमवार को जैन समाज द्वारा विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। जन्मवाचन के बाद समाजजनों द्वारा केसर के छापे लगाकर एक-दूसरे को बधाई देते हुए भगवान महावीर का जन्मोत्सव मनाया गया।

मुनि आदर्शरत्नसागर आदि ठाणा 5 साध्वी गुणज्ञाश्रीजी आदि ठाणा 8 की पावन निश्रा में पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन सुबह अजीतनाथ जैन मंदिर एवं वासुपूज्य तारकधाम जैन मंदिर में पक्षाल, प्रभु की पूजा एवं आरती हुई। उसके बाद ओसवाल भवन में 14 सपनाजी के चढ़ावे के बाद सपनाजी को झुलाया गया।

साधार्मिक वात्सल्य
महामांगलिक के लाभार्थी अशोक कुमार सागरमल काशीबर्डियावाला परिवार की ओर से आयोजित एवं साधार्मिक वात्सल्य के बाद 12:39 बजे को आचार्य नवरत्नसागर सूरिश्वर मसा की सभी रोग शोक नाशक, दुख-दरिद्र हरने वाली रिध्दि-सिध्दी प्रदायक महाप्रभावशाली महामांगलिक का मुनि आदर्शरत्नसागर के मुखारविंद से संगीत के साथ श्रवण कराया गया।

मुनिश्री ने कराया जन्म वाचन
दोपहर में 2 बजे वासुपूज्य तारकधाम जैन मंदिर में मुनि आदर्शरत्न ने जन्मवाचन करवाया। बाद में दोपहर 3 बजे कमलकुंडी से जलयात्रा की शोभायात्रा निकाली गई। जिसके लाभार्थी चांदमल नाथूलाल मुनपुरा परिवार रहे। जलयात्रा का समापन अजीतनाथ जैन मंदिर में हुआ। उसके बाद जैन ओसवाल भवन में मुनि आदर्शरत्न के मुखारविंद से जन्मवाचन हुआ। इसके पूर्व लाभार्थी अशोक कुमार सागरमल काशीबर्डिया वाला परिवार ने श्रीसंघ को केसर के छापे लगाए व पालनाजी घर ले जाने के लाभार्थी शांतिलाल भंवरलाल मामा परिवार रहे।

इन्होंने लिया श्रीफल बदारने का लाभ
प्रभु के जन्म समय पालना श्रीफल बदराने का लाभ अशोककुमार वैरायटी परिवार, पालनाजी को झूला देने का लाभ मनोहरलाल चांदमल लाड़वा राठोर रहे। वहीं वासुपूज्य तारकधाम जैन मंदिर में छापे लगाने का लाभ गौतमकुमार परिवार ने लिया। जानकारी समाज के अशोक नाहर ने दी। उन्होंने बताया कि मुनि आदर्शरत्नसागर के मुखारविन्द से कल्पसूत्र में भगवान महावीर के जन्मवाचन में वीर प्रभु त्रिशला माता के गर्भ में आए तब माता 14 महास्वप्न को देखकर जाग्रत होती हैं।

त्रिशला नंदन के जयकारों से गूंजा मंदिर
पूज्यश्री से वाचन सुनकर समाजजन त्रिशला नंदन वीर की, जय बोलो महावीर की... नारे लगाते हुए झूम उठे। रविवार रात को दोनों मंदिर में संगीतमय भक्ति की गई। भगवान की अंगरचना की गई। अजीतनाथ जैन मंदिर की अंगरचना के लाभार्थी सागरमल बसंतीलाल राम सिन्हा रहे।

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