script साहब! मैं रिश्वत लेता नहीं हूं, मेरा तो काम ही यही है…असिस्टेंट कमिश्नर के स्टेनो का खुलासा सुन अधिकारी हैरान | Anti corruption team arrested SGST assistant commissioner personal staff taking bribe Steno told truth in agra | Patrika News

साहब! मैं रिश्वत लेता नहीं हूं, मेरा तो काम ही यही है…असिस्टेंट कमिश्नर के स्टेनो का खुलासा सुन अधिकारी हैरान

locationआगराPublished: Jan 22, 2024 03:50:49 pm

Submitted by:

Vishnu Bajpai

UP News: यूपी की ताजनगरी आगरा में विजिलेंस टीम ने एसजीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर के स्टेनो को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा। इसके बाद पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आइए जानते हैं…

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Anti Corruption Team Action in Agra: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में तैनात एसजीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर के रिश्वत लेने का खुलासा हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि असिस्टेंट कमिश्नर ने रिश्वत लेने के लिए अलग से निजी स्टेनो रखा था। विजिलेंस टीम ने जब असिस्टेंट कमिश्नर के स्टेनो को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा तो उसने कई चौंकाने वाले खुलासे कर दिए। स्टेनो की बातें सुनकर विजिलेंस टीम में शामिल अधिकारी भी हैरान रह गए। एंटी करप्‍शन टीम के अनुसार आगरा में असिस्टेंट कमिश्नर निजी कर्मी से वसूली कराते थे। यह पैसा पत्नी और रिश्तेदारों के खाते में भेजा जाता था। मनीष नामक यह व्यक्ति सहायक कमिश्नर का स्टेनो के रूप में काम कर रहा था। विभाग के अधिकांश कर्मचारी और व्यापारी उसे स्टेनो बाबू कहकर ही संबोधित किया करते थे। बहरहाल आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें असिस्टेंट कमिश्नर भी आरोपी बनाए गए हैं।

एसजीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर के स्टेनो ने खोले कई राज


यूपी में विजिलेंस टीम की लगातार छापेमारी से विभागों में खौफ पैदा हो गया है। इससे बचने के लिए अधिकारी नए नए पैंतरे अपना रहे हैं। आगरा में एंटी करप्‍शन टीम के हाथ लगे एसजीएसटी के स्टेनो ने इसकी पोल खोलकर रख दी। यहां कुछ दिन पहले विजिलेंस टीम ने नगर निगम की एक राजस्व निरीक्षक को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। इसके बाद बीते शुक्रवार की दोपहर तकरीबन 12 बजे एसजीएसटी के एक सहायक कमिश्नर के आवास विकास स्थित आवास पर एंटी करप्‍शन टीम ने छापेमारी कर दी। हालांकि मौके पर असिस्टेंट कमिश्नर नहीं मिले। इसके बाद टीम जयपुर हाउस स्थित एसजीएसटी कार्यालय पहुंच गई। यहां टीम ने एसजीएसटी के सहायक कमिश्नर के कार्यालय में मौजूद एक कर्मचारी को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।

जीएसटी नंबर सही करने के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत


दरअसल, शमसाबाद रोड पर कहरई के पास रहने वाले अमरचंद का जीएसटी नंबर कैंसिल हो गया था। उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से रिवोकेशन फाइल किया। राज्य कर विभाग के कार्यालय में कई चक्कर लगाने के बाद भी उनका काम नहीं हुआ। यह कार्य राज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रवेश कुमार द्वारा होना था। इसलिए वे लगातार वहां संपर्क कर रहे थे। असिस्टेंट कमिश्नर के ऑफिस में सिकंदरा क्षेत्र में रहने वाला निजी कर्मचारी मनीष कुमार कार्यरत था। वह मूलरूप से बिहार के जमुई में बहादुरपुर गांव का रहने वाला है। एंटी करप्शन टीम ने मनीष कुमार को रंगे हाथ पांच हजार रुपए रिश्वत के रूप में लेते समय शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। जिससे एसजीएसटी विभाग में हड़कंप मच गया।
पूछताछ में बताया साहब मैं रिश्वत लेता नहीं हूं, मुझे तो नौकरी ही इस काम मिली है। जो ऊपरी कमाई की रकम होती है उसे मैं बड़े साहब के घरवालों को ऑनलाइन भेज देता हूं... यह शब्द थे असिस्टेंट कमिश्नर के यहां रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी के। दरअसल, राज्य कर विभाग में तैनात असिस्टेंट कमिश्नर का निजी कर्मचारी विजिलेंस ने रंगे हाथ धर दबोचा, उसने स्वीकारा कि वह साहब के घर और कार्यालय के काम करने के अलावा उनके लिए वसूली भी कर रहा था। नकद में रिश्वत लेता था और साहब के घरवालों को ऑनलाइन ट्रांसफर करता था। मेरठ कोर्ट ने निजी कर्मचारी को जेल भेज दिया है। मुकदमे में असिस्टेंट कमिश्नर प्रवेश कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।

खुल सकता है अब तक की वसूली का खेल


असिस्टेंट कमिश्नर प्रवेश कुमार के निजी कर्मचारी मनीष के मोबाइल में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड एंटी करप्शन टीम को मिला है। मनीष का मोबाइल जब्त कर लिया गया है। उसकी जांच में वसूली का पुराना खेल खुल सकता है।

एसजीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर के आदेश पर लेता था पैसा


पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह तीन साल से असिस्टेंट कमिश्नर के कार्यालय में काम कर रहा था। असिस्टेंट कमिश्नर के कहने पर वह निजी व सरकारी कार्य करता था उनके लिए रिश्वत भी लेता था। वसूली की जाने वाली रिश्वत को वह असिस्टेंट कमिश्नर प्रवेश कुमार को देता था। उसमें से पांच सौ या एक हजार रुपये उसे मिलता था। एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर संजय यादव ने बताया कि मनीष नकद में रिश्वत लेकर असिस्टेंट कमिश्नर की पत्नी व अन्य रिश्तेदारों के खाते में ऑनलाइन भेज देता था। इसके साथ ही कई बिल भी जमा करता था। मुकदमे में असिस्टेंट कमिश्नर को भी आरोपी बनाया गया है। असिस्टेंट कमिश्नर प्रवेश कुमार का पक्ष जानने के लिए से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला।

मनीष को रुपये दे दो, तुम्हारा काम कर दूंगा


ट्रैप करने के लिए एंटी करप्शन टीम शुक्रवार को कारोबारी को लेकर जयपुर हाउस स्थित राज्य कर विभाग पहुंची। वहां असिस्टेंट कमिश्नर ने उससे कहा कि मनीष को रुपए दे दो, तुम्हारा काम कर दूंगा. काम कराने के एवज में पांच हजार रुपए मनीष को देने के लिए कहा. एंटी करप्शन द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में इसका जिक्र है. इससे पहले भी प्रवेश कुमार ने मनीष से ही मिलने को कहा था।
-आगरा से प्रमोद कुशवाहा की रिपोर्ट

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