बच्चे के जन्मते ही परिजनों के उड़े होश, फिर सरकार की इस योजना ने लौटा दीं खुशियां

न्यूरल टयूब डिफेक्ट से पीड़ित था बच्चा, डॉक्टरों ने 17 दिन के बच्चे की रीढ़ की सर्जरी कर बचायी जान

आगरा। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (एनटीडी) की सर्जरी कर डॉक्टर ने सत्रह दिन के नवजात की जान बचाकर बच्चे के माता पिता का दामन खुशियों से भर दिया। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एत्मादपुर में बीती 27 अप्रैल को एक नवजात ने जन्म लिया। जन्म के समय से ही बच्चा न्यूरल टयूब डिफेक्ट से पीड़ित था। जिसे सीधी भाषा में रीढ़ में फोड़ा भी कह सकते हैं। बच्चे की बीमारी का पता लगने पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की तरफ से डॉक्टरों की टीम ने बच्चे की स्क्रीनिंग की और अपने डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा को बच्चे के बारे में बताया। रमाकान्त ने आयुष्मान भारत योजना के जिला कार्यक्रम प्रभारी डॉ. आशीष के सहयोग बच्चे को पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां बच्चे की सर्जरी की गयी। बच्चे की सर्जरी करने वाले डॉ. किशोर पंजवानी ने बताया कि यह एक जन्मजात बीमारी है। अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं हो पाये तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

जन्मजात रोगों की पहचान के लिए प्रशिक्षित है स्टाफ
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डिलीवरी प्वाइंट यानि जिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक डॉक्टर और स्टाफ नर्स को जन्मजात रोगों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया गया है। प्रसव के समय जब ऐसे बच्चे की पहचान होती है तो तत्काल स्टाफ के लोग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम को सूचित करते हैं।

साल में 4 से 5 बच्चे होते हैं चिह्नित
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल डॉ. आर के अग्निहोत्री और डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अपने खान-पान पर उचित ध्यान नहीं देतीं। इसके चलते इस तरह के जन्मजात रोग बच्चों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। जिले में प्रत्येक वर्ष जन्म लेने वाले 4 से 5 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित मिलते हैं।

बच्चे के माता पिता बोले
बच्चे के पिता शशि कुमार ने बताया कि बच्चे के जन्म लेते ही उसकी पीठ पर इतना बड़ा फोड़ा देखकर हम लोगों के होश ही उड़ गये। सीएचसी के डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। शशि बताते है कि तभी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम अस्पताल पहुंची और बच्चे को हालचाल पूछा। उसे तत्काल शहर के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए कहा। बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डाक्टरों ने निःशुल्क उसका पूरा इलाज किया। आज बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है।

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धीरेंद्र यादव
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