Ahmedabad's 14 Student gets All india rank in CA Final सीए फाइनल में अहमदाबाद के 1४ विद्यार्थी बने रैंकर

देश के टॉप-५० में बनाई जगह

 

By: nagendra singh rathore

Published: 14 Aug 2019, 09:27 PM IST

अहमदाबाद. द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की ओर से मई-२०१९ में ली गई सीए फाइनल (नए एवं पुराने कोर्स) की परीक्षा का मंगलवार को घोषित परिणाम में अहमदाबाद के 14 विद्यार्थियों ने देश के टॉप-५० विद्यार्थियों ने स्थान पाया है। पुराने कोर्स में 11 जबकि नए कोर्स में तीन रैंकर हैं।
अहमदाबाद सेंटर का पुराने कोर्स का परिणाम २७.७४ प्रतिशत, जबकि नए कोर्स का परिणाम ३३.१२ प्रतिशत रहा। पुराने कोर्स में परीक्षा देने वाले ५३० में से १४७ और नए कोर्स में परीक्षा देने वाले ३१४ में से १०४ विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं।
आईसीएआई के सेंट्रल कमेटी सदस्य अनिकेत तलाटी ने बताया कि मई २०१९ में ही अकेले देश में १५ हजार नए सीए बने हैं, जिसमें से अहमदाबाद से करीब ४००-४५० सीए शामिल हैं।
अहमदाबाद से जिन विद्यर्थियों ने रैंक पाई है उसमें सयनिका रॉय ने चौथी, मोहनिस कानाबार ने नौवीं, आनंद शाह ने 12वीं, आशका शाह ने 13वीं, धीर दुग्गड़ ने 25वीं, कैवल पटेल एवं स्वाती माहेश्वरी ने २९वीं रैंक पाई है। अभिषएक पटेल ने ३५वीं, दर्शन मोदी ने ३८वीं, भूमि पटेल ने ३९वीं, शगुन मुन्ध्रा ने ४१वीं, आयुषी शाह ने ४२वीं और अंकित इनानी एवं विशांगी शाह ने संयुक्त रूप से ४३वीं रैंक पाई है।

संस्थान के स्टडी मटीरियल से करो तैयारी: सयनिका
सीए फाइनल पुराने कोर्स में देश में चौथी रैंक पाने वाली अहमदाबाद की सयनिका रॉय का कहना है कि सभी को इंस्टीट्यूट के स्टडी मटीरियल से ही तैयारी करनी चाहिए। एक विषय के लिए किसी एक रेफरेंस मटीरियल से ही तैयारी करो। मॉक टेस्ट को भी गंभीरता से देना चाहिए। सयनिका ने आईपीसीसी में भी 19वीं रैंक पाई थी। वह बताती हैं कि पहले पहली रैंक लाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बाद में तय किया कि टॉप-9 में तो स्थान पाना ही है। दिन के 12 घंटे पढ़ाई की। पिता सुजीत रॉय सीएमए हैं, जबकि मां सम्पा रॉय इसरो सेक अहमदाबाद में सेवारत हैं।

रैंकर बनने के लिए भी जरूरी नहीं है कोचिंग
सीए फाइनल में देश में 12वीं रैंक पाने वाले आनंद शाह का कहना है कि देश में टॉप-५० रैंकर में स्थान पाने के लिए कोचिंग की कोई जरूरत नहीं है। गुजराती माध्यम का विद्यार्थी होते हुए भी वह रैंकर बने हैं। पिता हितेशभाई प्लायवुड का व्यापार करते हैं। सात महीने आठ घंटे नियमित पढ़ाई की। आईपीसीसी में भी देश में 16वीं रैंक आई थी।

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