एसटी में सफर करें जरा संभल कर!

 बसों में मारना पड़ सकता है धक्का

अहमदाबाद. यदि आप गुजरात राज्य परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) की बसों में सफर कर रहे हैं तो जरा संभल के। आपको बस में धक्का भी मारना पड़ सकता है। एसटी की 2839 ऐसी बसें दौड़ी, जो बैटरी या स्टार्टर बगैर की थी। इसके चलते जब भी इन बसों को स्टार्ट करना हो तो यात्रियों को इनमें धक्का मारने की नौबत आई। ये आंकड़ेे एसटी वर्कशॉप में एक से 25 फरवरी तक आई बसों से सामने आए।
भले ही एसटी निगम सुरक्षित बस सेवा का दावा करता हो, लेकिन निगम की 7266 बसों में से आधे से ज्यादा बसें वर्कशॉप में मरम्मत के लिए पहुंची। जहां 21574 बार बसें ब्रेक डाउन हुई तो 3927 बसें ऐसी रहीं जो बड़ी मरम्मत के चलते उनको वर्कशॉप में ले जाया गया तो करीब नौ सौ बसें बंद हालत में हैं।
राज्य में एसटी के 16 जोन हैं, जिनमें 7266 बसें हैं, जिनका संचालन गुजरात राज्य परिवहन निगम के हाथों में हैं। देखा जाए तो 7266 बसों में से एक हजार से ज्यादा ऐसी बसें हैं जो स्पेयरपार्ट्स या टायर-ट्यूब की कमी से बंद हालत में हैं तो बेटरी या स्टार्टर की कमी से 2800 से ज्यादा ऐसी बसें जो धक्का मारकर ही चालू की गईं, जिसमें सबसे ज्यादा बसें राजकोट में 848, हिम्मतनगर में 590 और गोधरा में 308 थीं। अहमदाबाद की 495 के अलावा पालनपुर ४४८, राजकोट, वलसाड डिवीजन में सबसे ज्यादा बसें भारी मरम्मत के लिए वर्कशॉप में भेजी गईं।

टिकट चेकिंग से एक करोड़ 91 लाख आमदनी
वडोदरा. वडोदरा मंडल ने फरवरी माह में टिकट चेकिंग का अभियान चलाया, जिसमें 39,450 केसों बनाए, जिसमें यात्रियों से एक करोड़ 91 लाख रुपए राशि वसूली गई। यह राशि पिछली साल के फरवरी माह से 67.78 फीसदी अधिक है। टिकट चेकिंग अभियान में मंडल की डभोई टीम के टीटीई नागेंद्र झा ने लगभग 1100 केसों से 6.37 लाख रुपए की आमदनी कर सर्वाधिक योगदान किया। पश्चिम रेलवे की यात्रियों से अपील है कि वे उचित टिकट खरीदकर यात्रा करें।

Pushpendra Rajput
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