कोकलियर इम्पलांट से मिली 2000 से अधिक को आवाज

जन्म के दौरान थोड़ी सतर्कता बरती जाए तो कोई नहीं रहेगा मूकबधिर

By: Omprakash Sharma

Published: 24 Sep 2021, 11:05 PM IST

अहमदाबाद. कोकलियर इम्पलांट मूकबधिरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आमतौर पर जन्म लेने वाले हजार बच्चों में से कोई तीन किसी न किसी प्रकार से बहरेपन का शिकार होते हैं। जन्म के दौरान यदि सतर्कता बरती जाए तो एक भी बच्चा मूक बधिर नहीं रहेगा।
गुजरात में कोकलियर इम्पलांट के सहारे सबसे पहले वर्ष 2004 में मूकबधिर को आवाज दिलाने वाले ईएनटी सर्जन डॉ. राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि जन्म के बाद यदि बहरेपन का टेस्ट करा दिया जाए तो यह समस्या जड़मूल से खत्म हो जाएगी। गुजरात में अब तक दो हजार से अधिक इम्पलांट हो चुके हैं और सभी का परिणाम बेहतर है। कोकलियर इम्पलांट ग्रुप ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके डॉ. विश्वकर्मा ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में देश का पहला (सरकारी अस्पतालों) में कोकलियर इम्पलांट किया था। इसके बाद अब तक तीन हजार इम्पलांट देश के विविध भागों में कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कोकलियर इम्पलांट ऐसा कृत्रिम कान है जिससे मूकबधिरता जैसी समस्या से निजात पाई जा सकती है।

कम आयु में कोकलियर इम्पलांट बेहतर
कोकलियर इम्पलांट के बेहतर परिणाम कम आयु में मिलते हैं। क्योंकि कोकलियर इम्पलांट से व्यक्ति सुनने लग जाता है लेकिन बोलने में तकलीफ होती है। जिस तरह से बचपन से बोलना सीखा जाता है ठीक उसी तरह से कोकलियर इम्पलांट के बाद बोलने की ट्रेनिंग (स्पीच थेरेपी) की जरूरत होती है। डॉ. विश्वकर्मा का कहना है कि अब ज्यादातर राज्यों में सरकार की आर्थिक सहायता से ये इम्पलांट किए जा रहे हैं। इस तरह की सहायता से गुजरात में वर्ष 2013 में कोकलियर इम्पलांट किया गया था।

सिविल अस्पताल में ही डेढ़ हजार से अधिक इम्पलांट
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. देवांग गुप्ता ने बताया कि सिविल अस्पताल में ही डेढ़ हजार से अधिक कोकलियर इम्पलांट हो गए हैं। आमतौर पर एक इम्पलांट की कीमत छह से आठ लाख रुपए तक हो सकती है लेकिन गुजरात सरकार ने स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के अन्तर्गत इस तरह का ऑपरेशन निशुल्क होता है। यही कारण है कि सैकड़ों बच्चे आए दिन मूक-बधिरता जैसी समस्या के चंगुल से छूट रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बच्चे के जन्म के दौरान बहरेपन का टेस्ट कराएं, ताकि आगे चलकर किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े।

Omprakash Sharma Reporting
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