दांडी यात्रा के दौरान आणंद के डी.एन. हाईस्कूल में दो रात रुके थे गांधीजी

आणंद का डी.एन. हाईस्कूल

20 हजार लोगों की सभा में बापू ने कहा : सत्याग्रही का मार्ग है प्रेम पथ

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 26 Sep 2021, 08:39 PM IST

बुरहान पठाण

आणंद. दांडी यात्रा के दौरान महात्मा गांधी आणंद के डी.एन. हाईस्कूल में दो रात और एक दिन रुके थे। उस समय की यादें वर्तमान समय में भी स्कूल में ताजा होती हैं।
अहमदाबाद के साबरमती (गांधी) आश्रम से दांडी यात्रा शुरू कर 16 मार्च 1930 की रात को गांधीजी आणंद पहुंचे थे। गांधीजी व उनके साथियों ने चरोतर केलवणी मंडल (वर्तमान में डी.एन. हाईस्कूल) में रात्रि विश्राम किया था। 17 मार्च 1930 को दांडी यात्रा का आराम का दिन था। उस दिन बड़ी संख्या में स्थानीय नेताओं ने गांधीजी से मुलाकात का लाभ लिया था।
चरोतर केलवणी मंडल के मैदान पर सभा का आयोजन किया गया था। उस सभा में 20 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। प्रार्थना व राष्ट्रभक्ति से सभा की शुरुआत हुई। आणंद के पंडित खरे ने आणंद के समीप संदेसर गांव के भक्तकवि प्रीतमदास का भजन हरि नो मारग छे सूरा नो गाया था। गांधीजी का यह एक प्रिय था। आश्रम भजनावली में भी प्रीतमदास का यह भजन शामिल है।
सभा में गांधीजी ने कहा कि हाल ही पंडित खरे की ओर से प्रस्तुत भजन सभी ने सुना। इस भजन में प्रेम पथ को पावक की ज्वाला है। सत्याग्रही का मार्ग प्रेम पथ है, यह वेर भाव का पथ नहीं है। कठोर से कठोर हृदय के दुश्मन को भी प्रेम से जीतने की सत्याग्रही की महत्वाकांक्षा होती है। कानून को सविनय भंग करना और उसके पीछे केवल प्रेम ही है। इस प्रकार का दर्शन किस प्रकार किया जा सकता है, प्रीतम को ऐसा साक्षात अनुभव हुआ इसलिए यह भजन हृदय से निकला।
गांधीजी ने कहा था कि वे इस समय पैसे की भिक्षा मांगने नहीं निकले हैं, वे तो बड़ी भिक्षा लेने आए हैं। पाटीदारों को चरोतर की नाक बताते हुए उन्होंने कहा था कि पाटीदार समुद्र में नमक के समान हैं, नमक अपना लक्षण छोड़ दे तो मिठाई कैसे दी जा सकती है। नमक में गुड़ या साकर से अधिक मीठास होता है। गुड़-साकर से पीलिया होता है लेकिन थोड़ा नमक सेवन करने से भोजन मीठा लगता है। आणंद अपनी मीठास छोड़ दे। पादीदारों में बहादुरी आदि के गुण हैं, ऐसे दर्शन इस समय आणंद में नहीं हो तो कहां हो सकते हैं?
गांधीजी के वक्तव्य के बाद सभास्थल पर भारत माता की जय और जय हिन्द के नारे गूंज उठे। दो रात व एक दिन के विश्राम के दौरान अनेक लोगों ने सत्याग्रह में अपना सहयोग दिया था। आणंद के नरसिंह ईश्वर पटेल सपरिवार सत्याग्रह मेंअ जुड़े थे। पंडित खरे की ओर से गाए गए रघुपति राघव राजा राम की धुन के साथ 18 मार्च 1930 को दांडी यात्रा आणंद से दांडी के लिए रवाना हुई थी।
आणंद के डी.एन. हाईस्कूल में गांधीजी ने विश्राम के दौरान सेवा कार्य किए थे, उस समय की तस्वीरें जर्जरित होने के कारण चरोतर एजुकेशन ट्रस्ट में जमा किया गया है। आणंद के सामाजिक कार्यकर्ता असलम खोखर के अनुसार वर्तमान समय में राजनेता केवल दिखावे के लिए खादी पहनते हैं, युवाओं में केवल गर्मी के मौसम में खादी के प्रति लगाव दिखाई देता है। वर्तमान समय में गांधीजी के विचार केवल बातों में ही दिखाई देते हैं, लोग गांधीजी के विचार भूल रहे हैं।

Rajesh Bhatnagar
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