कोरोना से डर और डिप्रेशन का भूत इस बार कितना ताकतवर

  • अनिद्रा, तनाव और नकारात्मक विचार वाले मरीज भी बढ़े, मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं इस तरह के मरीज

By: Ram Naresh Gautam

Published: 14 Apr 2021, 06:22 PM IST

ओम प्रकाश शर्मा
अहमदाबाद. कोरोना के चलते डर यूं तो गत वर्ष भी कम नहीं था लेकिन पिछले करीब 15 दिनों से ज्यादा समय से यह डर इतना बढ़ गया कि कई लोग अब ठीक से सो नहीं पा रहे हैं।

कई लोगों में सबसे अधिक डर बैठा हुआ है जो खुद संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हैं और उनके परिजनों को संक्रमित होने के चलते होम क्वारेन्टाइन किया गया है।

ऐसे में स्वजनों की चिंता में मरीज बेचैनी में दिन बीता रहे हैं। आम लोगों को यह चिंता सता रही है जिस तरह की स्थिति है उसमें यदि कोरोना का संक्रमण लग गया तो कहां भर्ती होंगे।

मनोचिकित्सकों के मुताबिक पिछले लगभग एक महीने से ज्यादा समय से अहमदाबाद समेत गुजरात में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मरीजों से फुल हो रहे अस्पताल और महत्वपूर्ण दवाइयों के लिए लंबी कतार की खबरों से लोग खुद के संक्रमित होने की आशंका से ही सहमे हैं।

इस तरह के डर और डिप्रेशन के बीच नींद नहीं आना, बेचैनी बढऩा, सीने मे दर्द होना, गला सूखना और नकारात्मक विचार आना जैसे लक्षणों के साथ मनोचिकित्सक के पास पहुंचने लगे हैं।

शहर के सरकारी मानसिक रोग अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रमाशंकर यादव ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कोरोना के खौफ से लोगों में नकारात्मक विचार बढ़ गए हैं।

जिससे नींद नहीं आने के केस भी बढ़े हैं। लोगों में सबसे बड़ा डर अपनों को लेकर है और यह डर उन लोगों में सबसे अधिक है जिन्होंने अपने किसी स्वजन को कोरोना से खो दिया है।

केस 01
45 वर्षीय एक बिल्डर को कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां वह अपने परिजनों को लेकर डर के साए में उपचार ले रहा है। उधर, बिल्डर का बच्चा और पत्नी भी संक्रमित हैं।

ऐसे में उनका सोचना है कि यदि अब पत्नी को भी अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत हुई तो बच्चे का ध्यान कैसे रख पाएंगे। इस डर के कारण उन्हें नींद नहीं आती है।

केस 02
एक युवक पिछले करीब दो माह से अपनों के बीच इसलिए नहीं नींद ले पा रहा है कि कहीं उसकी वजह से घर के लोग संक्रमित नहीं हो जाएं।

जबकि वास्तविकता यह है कि इस युवक को कोरोना का संक्रमण नहीं है और न ही उसके परिजनों को। युवक दिन में नौकरी करता है और यह सोचता है कि कोरोना संक्रमण उसके अपनों को न लग जाए।

केस 03
सूरत में डायमंड कंपनी में काम करने वाला 35 वर्षीय युवक पिछले दिनों अपने परिजनों के पास अहमदाबाद आया था। यहां उसकी तबीयत खराब होने पर कोरोना का टेस्ट कराया गया जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

स्थिति खराब होने पर उसे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने चिकित्सक को बताया कि माता-पिता भी संक्रमित हो गए हैं।

अब वह उन दोनों का कैसे ध्यान रख सकेगा। अस्पताल भी फुल होने लगे हैं। ऐसे में माता-पिता की तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो क्या होगा।

  • कोरोना से जुड़ी बातें करते हैं ज्यादातर लोग
    ओपीडी के दौरान ज्यादातर लोग भी कोरोना संबधित ही बात करते नजर आते हैं। एक दूसरे से लक्षण पूछते हैं या आशंका जताते हैं। कुल मिलाकर कोरोना को लेकर खौफ बढ़ गया है।
    डॉ रमाशंकर यादव, मनोचिकित्सक, मानसिक अस्पताल
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