अजमेर डिस्कॉम की लैब ने बताया ओके, टाटा ने बताई चोरी

बड़ा सवाल: किसको मानें सही,चक्करघिन्नी बना उपभोक्ता

उपभोक्ता व टाटा के इंजीनियर की मौजूदगी में डिस्कॉम की लैब में हुई थी जांच
टाटा ने अपनी लैब में जांच कर उपभोक्ता को बताया बिजली चोर, 88 लाख का जुर्माना

एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी

By: bhupendra singh

Published: 22 Oct 2019, 05:03 AM IST

भूपेंद्र सिंह

अजमेर. शहर के उपभोक्ताओं के साथ इन दिनों बिजली कम्पनियों द्वारा अपनाई जा रही कार्यप्रणाली समझ से परे नजर आ रही है। एक ही मामले में उपभोक्ता को अजमेर डिस्कॉम Ajmer Discom's की मीटर टेस्टिंग लैब द्वारा उसके एलटीसीटी मीटर (एक्स 0444262/ पीएससी/22088) की जांच कर ओके बताया जाता है। वहीं चार दिन बाद टाटा पावर tata power लैब की ओर से उपभोक्ता को कसूरवार बताते हुए 90 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया जाता है। डिस्कॉम की लैब में हुई मीटर की जांच के दौरान टाटा पावर के इंजीनियर व उपभोक्ता मौजूद थे। यह मीटर उपभोक्ता के परिसर से बिजली चोरी के संदेह पर उतारा गया और सील मुहर कर डिस्कॉम की लैब में जांच के लिए लाया गया था। मीटर की जांच के बाद बिना सील मीटर टाटा पावर को सौंप दिया गया। चार दिन बाद उपभोक्ता को टाटा पावर ने अपनी लैब में बुलाया, मीटर की जांच कर उसमें स्टंट लगे होने की रिपोर्ट तैयार कर उपभोक्ता पर 90 लाख का रुपए का जुर्माना लगा दिया। टाटा पावर उपभोक्ता पर एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी में है। उपभोक्ता का कहना है कि बिना उसकी सहमति के टाटा पावर की लैब में एलटीसीटी मीटर की जांच की गई है।
सवाल मांगते जवाब

किसकी रिपोर्ट को सही मानें डिस्कॉम की लैब या टाटा पावर की लैब की रिपोर्ट को। डिस्कॉम की 19 सितम्बर को लैब में एलटीसीटी मीटर सील बंद स्थिति में पहुंचा था और उपभोक्ता व टाटा के इंजीनियर की मौजूदगी में जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट आेके आई। इस पर टाटा के इंजीनियर ने हस्ताक्षर भी किए हैं। यदि टाटा पावर को आपत्ति थी तो डिस्कॉम की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करवाने के दौरान दर्ज करवानी चाहिए थी। उस समय आपत्ति क्यों दर्ज नहीं करवाई गई। डिस्कॉम की लैब से टाटा पावर के कर्मचारी जांचा हुआ मीटर बिना सील करवा लाए थे। यदि पुन: मीटर की जांच की आवश्यकता होती तो उसे सील करवा कर लाना चाहिए था। जब एलटीसीटी मीटर सील ही नहीं था टाटा ने अपनी रिपोर्ट में क्यों लिखा कि उपभोक्ता की मौजूदगी में मीटर की सील खोली गई। टाटा की रिपोर्ट पर उपभोक्ता के हस्ताक्षर नहीं है। टाटा पावर की वीसीआर में मौके पर मीटर बॉक्स की चारों सीलों को सही बताया गया है जबकि बिना सीलों को खोले मीटर व एलटीसीटी को बाहर नहीं निकाला जा सकता है, दोनो ही विरोधाभाषी बाते हंै। टाटा ने उसी दिन जांच क्यों नही करवाई, तीन दिन बाद क्यों करवाई।
मेरा क्या कसूर

उपभोक्ता नरेश कुमार मनकानी का कहना है कि यदि टाटा पावर को डिस्कॉम की लैब की जांच पर आपत्ति थी, तो उसी समय दर्ज करवानी चाहिए थी। डिस्कॉम की लैब से बिना सील किए हुए मीटर टाटा पावर के कर्मचारी लेकर आए थे। एेसे में बाद में मीटर की जांच करना संदेह की स्थिति पैदा करता है। मैं तो सरकारी लैब की रिपोर्ट को ही सही मानूंगा। यदि डिस्कॉम व टाटा पावर मेरी सुनवाई नहीं करेंगे तो मुझे मजबूरन न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।
इनका कहना है

उपभोक्ता का मामला दिखवाया जा रहा है। सिटी एसई को जुर्माना राशि का असेसमेंट जांचने के निर्देश दिए गए है। मामला समझौता समिति में लेकर निस्तारित किया जाएगा।
वी.एस.भाटी, एमडी, अजमेर डिस्कॉम

मैने उपभोक्ता के एलटीसीटी मीटर की लैब में जांच की थी। जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी मीटर में नहीं पाई गई। मीटर ओके था। मैंने बिना सील किए हुए मीटर वापस टाटा पावर के कर्मचारी को दिया था।

रीना जैन, तत्कालीन एईएन,मीटर टेस्टिंग लैब,अजमेर डिस्कॉम
डिस्कॉम की लैब में मीटर की जांच हुई थी। हमारी लैब में एलटीसीटी की जांच की गई थी इसमें सर्किट लगा हुआ था। इसे रिमोट से चलाया जा रहा था। इसके जरिए चोरी की जा रही थी।

गजानन्द काले,सीईओ फ्रेंचायजी, टाटा पावर अजमेर
हमारी बड़ी लैब है। मीटर एलटीसीटी की जांच होती है। लैब में मीटर व एलटीसीटी की जांच की गई गई थी। रिपोर्ट में इसका उल्लेख है।

आर.एस.जैन,एसई,मीटर अजमेर डिस्कॉम

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bhupendra singh Reporting
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