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आनंदपाल के भाई ने किया एसओजी निरीक्षक पर हमला, जेल में मची अफरा-तफरी

इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। बाद में सुरक्षा प्रहरियों ने उस पर काबू पाया।
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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 5 Sep 2017, 6:48 PM IST

इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। बाद में सुरक्षा प्रहरियों ने उस पर काबू पाया।

इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। बाद में सुरक्षा प्रहरियों ने उस पर काबू पाया।

कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल के एन्काउन्टर के बाद उसके भाई अपना असली रंगत दिखाने लगे हैं। यहां हाई सिक्योरिटी जेल में बंद आनंदपाल के भाई रूपेंद्रपाल ने मंगलवार को एसएओजी निरीक्षक पर हमला कर दिया। उसने निरीक्षण के दौरान पीछे से निरीक्षक के मुक्का जड़ दिया। इससे जेल में अफरा-तफरी मच गई। बाद में सुरक्षा प्रहरियों ने उस पर काबू पाया।

हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगस्टर आनंदपाल का भाई रूपेंद्र पाल उर्फ विक्की बंद है। मंगलवार को एसओजी के निरीक्षक सूर्यवीर सिंह उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार करने जेल पहुंचे। यहां जेल से निकलते वक्त विक्की ने पीछे से निरीक्षक पर हमला कर दिया। उसने निरीक्षक सिंह को जोरदार मुक्का जड़ दिया।

अचानक हुई घटना से जेल का स्टाफ हतप्रभ रह गया। सुरक्षा प्रहरियों ने तत्काल विक्की को काबू किया। मामले की जानकारी मिलते ही आईजी मालिनी अग्रवाल, एस. पी. राजेंद्र सिंह और अन्य ने जेल स्टाफ से बातचीत की।

आनंदपाल की मौत ...
बीती जून में एसओजी ने चूरू जिले के मालासर गांव में घेराबंदी कर आनंदपाल का एनकाउंटर किया था। उस वक्त वह एक मकान में शरण लिए हुए था। पुलिस ने पहले हरियाणा से उसके भाई विक्की और रिश्तेदार को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर एसओजी ने तत्काल प्लानिंग बनाई। एसओजी के आईजी दिनेश एम. एन के निर्देशन में पुलिस ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

मौत के बाद हुआ ड्रामा
आनंदपाल की मौत के बाद जबरदस्त हंगामा हुआ। उसके परिजनों ने पैतृक गांव सांवराद में शव की अंत्येष्ठि से इनकार कर दिया। सांवरलाल की पत्नी, पुत्री और मां ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की। मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता चला गया। १२ जुलाई को सांवराद में राजपूत समाज ने हुंकार रैली रखी। इसमें १ लाख से ज्यादा लोग जुट गए। शाम को भीड़ बेकाबू हो गए।

लगाना पड़ा सरकार को कफ्र्यू
सांवराद में भीड़ ने जबरदस्त हंगामा मचाया। नागौर के एसपी पारिस देशमुख की कार पर हमला बोलकर उलट दिया। इसके अलावा आईपीएस मोनिका सेन को घेर लिया। हमले में २१ पुलिसकर्मी और २८ लोग घायल हो गए। रेलवे स्टेशन पर भी आगजनी हुई। कथित तौर पर पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। स्थिति बिगडऩे पर सरकार को सांवराद में कफ्र्यू लगाना पड़ा। आखिर राज्य मानवाधिकार की कड़ी आपत्ति के बाद आनंदपाल की अंत्येष्ठी हुई।