राजस्थान के इस शहर के उपमहापौर का पुलिस ने खोला ऐसा राज, आप भी प ढ़ें क्या है पूरा मामला

नगर निगम चुनावों में पार्षद के नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता को लेकर मिथ्या तथ्य अंकित करना उपमहापौर संपत सांखला के समक्ष मुश्किलें पैदा कर सकता है।

By: सोनम

Published: 20 Jul 2018, 12:46 PM IST

अजमेर. नगर निगम चुनावों में पार्षद के नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता को लेकर मिथ्या तथ्य अंकित करना उपमहापौर संपत सांखला के समक्ष मुश्किलें पैदा कर सकता है। मामले में दायर एक याचिका पर अदालती आदेशों से पुलिस ने सांखला की शैक्षणिक योग्यता संबंधी रिपोर्ट गुरुवार को अदालत में सौंपी। इसमें सांखला को न केवल दसवी पास नहीं होना बल्कि नवी कक्षा में भी दो बार फेल होना भी बताया गया है। हालाकि सांखला खुद भी 2010 में दसवी कक्षा उत्तीर्ण नहीं होना मानते हैं।

 


सांखला के खिलाफ पूर्व पार्षद सत्यनारायण गर्ग ने वकील विवेक पाराशर के जरिए एक फौजदारी परिवाद प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर बताया कि वर्ष 2010 में सांखला 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने नामांकन पत्र में अंकित कॉलम में स्वयं को दसवी कक्षा पास बताया। परिवाद के आधार पर अदालत ने पुलिस को मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी।

 

सिविल लाइन थानाधिकारी ने गुरुवार को अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में सांखला को कक्षा 10 में उत्तीर्ण नहीं करना पाया। साथ वह गुजराती स्कूल में ही दो बार नवी कक्षा में अनुत्तीर्ण हुए थे। सांखला ने भी अदालत में यह जानकारी दी है कि नामांकन उनके कार्यकर्ताओं ने भरा था जबकि 2010 में चुनाव के समय में वह 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं थे।


यहां उलझा है पेच

वर्ष 2010 के चुनाव में सांखला को दसवी कक्षा उत्तीर्ण बताया तथा वार्ड 18 से नामांकन भरा। इस पर सवाल इसलिए खड़ा हुआ कि सांखला ने वर्ष 2015 में पार्षद का चुनाव लड़ा और उपमहापौर बने, इसके लिए उन्होंने दाखिल नामांकन में ओपन यूनिवर्सिटी दिल्ली से स्वयं को 10 वी पास बताया। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया कि जो विद्यार्थी एक संस्थान से पहले ही 10 वीं कक्षा पास है उसे दोबारा 10वीं पास करने की जरूरत क्यों पड़ गई।

 

पद पर लटकी तलवार
अदालत में परिवादी सत्यनारायण गर्ग द्वारा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33(क) व 125(क) के तहत प्रसंज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज करने की गुहार अदालत से की गई है। इस मामले में सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। कानूनी जानकारों की माने तो मामले में सत्यता की पुष्टि होती है तो रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष मिथ्या हलफनामा प्रस्तुत करना प्रमाणित होने पर उपमहापौर का पद छोडऩा पड़ सकता है। या वे नैतिकता के आधार पर भी स्वयं कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं।

 

सोनम Reporting
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