राष्ट्र का गौरव है हिन्दी, नहीं दुनिया की किसी भाषा से कम

राष्ट्र का गौरव है हिन्दी, नहीं दुनिया की किसी भाषा से कम

raktim tiwari | Publish: Sep, 16 2018 08:54:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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अजमेर. राष्ट्रभाषा हिन्दी दिवस पर शहर के सरकारी दफ्तरों, स्कूल, कॉलेज, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से कई संस्थानों में कार्यक्रम हुए। वक्ताओं ने हिंदी को राष्ट्र का गौरव, संस्कृति की प्रतीक और परस्पर मेलजोल बढ़ाने वाली भाषा बताया। सबने हिन्दी में अधिकाधिक संवाद, कामकाज पर जोर दिया।

राजकीय कन्या महाविद्यालय में विचार गोष्ठी में बोलते हुए पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. एन. के. भाभड़ा ने कहा भाषा मनुष्य का क्रांतिकारी अविष्कार है। यह वैचारिक अभिव्यक्ति का सरल और सशक्त माध्यम है। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी पूर्णत: वैज्ञानिक भाषा है। हिन्दी का प्रयोग एवं व्यवहार आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए केवल हिन्दी दिवस ही प्रमुख नहीं है। हर दिन, हर पल हिन्दी को अपनाया जाना चाहिए।

डॉ. अरविंद कश्यप ने कहा कि भारत गंगा-जमनी संस्कृति से वैभवशाली है। हिन्दी विश्व की किसी भाषा से कमतर नहीं है। हमें हिंदी को मन, वचन और कर्म से अपनाना चाहिए। हिन्दी विभाग प्रभारी डॉ. शमा खान ने कहा कि हिन्दी देश की आत्मा, सांस्कृतिक अस्मिता की भाषा है। इस दौरान काव्य पाठ, निबंध, पोस्टर और अन्य प्रतियोगिता हुई। काव्य पाठ में हर्षिता, दर्शिता व्यास, वर्षा शर्मा, ऐश्वर्या दाधीच, पोस्टर प्रतियोगिता में अक्षिता वर्मा विजेता रही। डॉ. अंजु ने धन्यवाद दिया। संचालन सुष्मा टाक ने किया।

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि हिन्दी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का गौरव है। यह भारतीय संस्कृति की ध्वनि है। यह राष्ट्रीय एकीकरण का प्रमुख माध्यम है। प्रबंध अध्ययन संकाय के प्रो. सतीश अग्रवाल ने हिन्दी की महत्ता पर प्रकाश डाला। हिन्दी विभाग की प्रभारी डॉ. दीपिका उपाध्याय ने राष्ट्रीय भाषा की बहुत अहमियत होती है। हमें दैनिक जीवन में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए। पत्र वाचन, काव्य पाठ, नारा लेखन प्रतियोगिता में शुभम देवड़ा, पूजा माहेश्वरी, रानू दाधीच ने प्रस्तुतियां दी। संचालन कोमल सोनी ने किया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के ग्रुप केंद्र प्रथम में हिंद पखवाड़े की शुरुआत हुई।

इस दौरान अधिकारी, कर्मचारी और जवान शामिल हुए। पखवाड़े के दौरान विभिन्न प्रतियोगिता होगी। विजेताओंको पुरस्कृत किया जाएगा। हरीसुंदर बालिक उच्च माध्यमिक विद्यालय में हिंदी दिवस पर कविता पाठ, भाषण, आशुभाषण प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। गुजराती उच्च माध्यमिक विद्यालय में हिंदी दिवस के तहत नारा लेखन, कविता वाचन, हिंदी कवि और लेखक परिचय, वाद-विाद, निबंध, आशु भाषण प्रतियोगिता हुई।

हिन्दी मीडियम के टीचर चेक करते कॉपी

विधि संकाय के विद्यार्थियों से मजाक हो रहा है। लॉ कॉलेज में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन इम्तहान में उनकी कॉपियां हिंदी माध्यम के शिक्षक जांच रहे हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती सहित अन्य विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक कम हैं। ऐसे में कई विद्यार्थियों को नुकसान हो रहा है।

राज्य में व4र्ष 2005-06 में 15 लॉ कॉलेज स्थापित हुए। इनमें अजमेर, भीलवाड़ा, सीकर, नागौर, सिरोही, बूंदी, कोटा, झालावाड़ और अन्य कॉलेज शामिल हैं। शुरुआत में लॉ कॉलेजों में विधि शिक्षकों की स्थिति ठीक रही, लेकिन लगातार सेवानिवृत्तयों से हालात बिल्कुल बिगड़ गए हैं। राज्य में विधि शिक्षा की सांसें फूल रही हैं। इनमें भी अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक अंगुलियों पर गिनने लायक भी नहीं हैं।

बढ़ रहे अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी

अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। 2010-11 तक इनकी संख्या 5-7 फीसदी तक थी। बीते चार-पांच साल में यह आंकड़ा 25 फीसदी तक पहुंच गया है। निजी स्कूल, सरकारी-निजी कॉलेज से अंग्रेजी माध्यम में स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी लॉ कॉलेज में प्रवेश लेते हैं। इनमें ज्यादातर विद्यार्थियों की अंग्रेजी अच्छी है। वे विधि संकाय की अंग्रेजी की पुस्तकों से पढ़ते हैं। साथ ही परीक्षा के दौरान अंग्रेजी माध्यम ही चुनते हैं।

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