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सरकार का बढ़ेगा टेंशन…20 को पेन डाउन हड़ताल, 27 से प्रदेशव्यापी आंदोलन

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mdsu agitation

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अजमेर

सातवां वेतनमान नहीं मिलने से प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कर्मचारी नाराज हैं। मंगलवार को अखिल विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।

मंत्रालयिक कर्मचारी संघ अध्यक्ष दिलीप शर्मा की अगुवाई में कर्मचारियों ने चाणक्य भवन के समक्ष नारेबाजी और प्रदर्शन किया। अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कार्मिकों का सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है।

सरकार ने विश्वविद्यालयों को बजट संबंधित बेतुका पत्र भी भेजा है। इससे सभी विश्वविद्यालयों में नाराजगी है। अखिल विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ की हाल में उदयपुर में बैठक हुई। इसमें सरकार के खिलाफ आंदोलन छेडऩे का फैसला किया गया है। इस दौरान मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष दुर्गेश भारद्वाज, महासचिव डॉ. आर. के. जैन, संयुक्त सचिव सुरेंद्र कुमावत, सहायक कर्मचारी संघ अध्यक्ष गुट्टाराम सेन और अन्य मौजूद थे।

20 को पेनडाउन हड़ताल

अध्यक्ष ने कहा कि पहले चरण में 20 अगस्त को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पेन डाउन हड़ताल होगी। सरकार ने सातवें वेतनमान को लेकर फैसला नहीं किया तो 27 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ होगी। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

नहीं भेजा वाजिब जवाब

सरकार को भेजे गए जवाब को लेकर भी कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। प्रचार सचिव गोपाराम ने कहा कि विश्वविद्यालय ने सरकार के पत्र का उचित जवाब नहीं भेजा। पत्र भेजने में विलम्ब के चलते सातवें वेतनमान का मामला अटका हुआह ै।

नहीं भेजा वाजिब जवाब

सरकार को भेजे गए जवाब को लेकर भी कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। प्रचार सचिव गोपाराम ने कहा कि विश्वविद्यालय ने सरकार के पत्र का उचित जवाब नहीं भेजा। पत्र भेजने में विलम्ब के चलते सातवें वेतनमान का मामला अटका हुआह ै।

आरएएस-प्री की उत्तरकुंजी पर आपत्ति

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2018 की उत्तरकुंजी पर आपत्ति देने का काम पूरा हो गया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग आपत्तियों के निस्तारण में जुटा है। विशेषज्ञ इनकी जांच कर रिपोर्ट देंगे।

आयोग ने 5 अगस्त को आरएएस प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन किया था। इसकी उत्तरकुंजी पर 13 अगस्त तक आपत्तियां मांगी गई थी। कई अभ्यर्थियों ने निर्धारित शुल्क देकर ऑनलाइन आपत्तियं दर्ज कराई हैं। अब आयोग इन आपत्तियों पर मिले प्रामाणिक तथ्यों, किताबों, रेफरेंस की जांच में जुट गया है।