Recruitments: कह चुके सीएम...समय पर होंगी भर्तियां-साक्षात्कार..

सरकार के आग्रह पर आयोग ने स्थगित की हैं परीक्षा-साक्षात्कार।

By: raktim tiwari

Published: 21 Sep 2020, 05:51 AM IST

अजमेर.

सीएम ने भर्ती परीक्षाएं और साक्षात्कार समय पर कराने को कहा है। लेकिन इसकी कितनी अनुपालना होगी यह कहना मुश्किल है। पिछले दिनों सरकार के कहने पर राजस्थान लोक सेवा आयोग कई साक्षात्कार और भर्ती परीक्षा स्थगित की हैं। कोरोना संक्रमण और तकनीकी समस्याओं के चलते नई तिथियां तय करना आसान नहीं है।

हाल में आयोग ने 20 से 27 सितंबर तक प्रस्तावित सहायक वन संरक्षक एवं फॉरेस्ट रेंज अधिकारी ग्रेड प्रथम (वन विभाग) संवीक्षा परीक्षा, 7 और 8 सितंबर को जनसंपर्क अधिकारी, 9 से 11 सितंबर तक समूह अनुदेशक /सर्वेयर/सहायक शिक्षुता सलाहकार- 2018, 14 से 22 सितंबर-उपाचार्य/अधीक्षक (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान), 23 से 30 सितंबर-खाद्य सुरक्षा अधिकारी 2018 (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाऐं विभाग) और 5 से 23 अक्टूबर तक आरएएस के साक्षात्कार स्थगित किए थे।

कोरोना या सियासी कारण....
आयोग ने कोरोना संक्रमण का कारण बताकर परीक्षाएं-साक्षत्कार स्थगित किए थे। लेकिन सियासी वजह भी सामने आई हैं। दरअसल आयोग के मौजूदा तीनों सदस्य भाजपा राज में नियुक्त हुए थे। बीते डेढ़ साल के कार्यकाल में सरकार चार नए सदस्यों की नियुक्तियां नहीं कर पाई है। इसके अलावा अध्यक्ष दीपक उप्रेती का कार्यकाल 14 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। सरकार नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी करना चाहती है।

दिए हैं सीएम ने निर्देश
सीएम अशोक गहलोत ने 19 सितंबर को जयपुर में आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड को भर्ती परीक्षाएं-साक्षात्कार समय पर कराने को कहा है। आयोग में सदस्यों की कमी को छोड़कर कोई बड़ी परेशानी नहीं है। वह जब चाहे तब परीक्षाएं-साक्षात्कार शुरू कर सकता है। लेकिन सरकार की मंजूरी जरूरी है।

विशेष अदालत में एसीबी के जवाब कुछ देर में बहस

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के निलंबित कुलपति रामपाल सिंह की गिरफ्तारी पर पेश किए एसीबी के जवाब पर सोमवार को विशेष अदालत में बहस होगी। एसीबी ने निलंबित कुलपति कुलपति की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर 16 सितंबर को जवाब दिया था।
निलंबित कुलपति रामपालसिंह की आरे से विशेष अदालत में वकील अजय वर्मा की ओर से प्रार्थना पत्र दायर किया था। इसमें बताया कि उसके खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी अनुचित है। उसने गिरफ्तारी पूर्व अधिनियम की धारा 17 के प्रावधानों की पालना नहीं करने की आपत्ति लगाते हुए खुद को शिक्षक और कुलपति जैसे सम्मानित पद पर होना बताया।

raktim tiwari Reporting
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