दिव्यांगों को सक्षम बनाने का अभियान चला रहा नारायण सेवा संस्थान

नारायण सेवा संस्थान के प्रेसीडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, ‘‘अब तक हमने 99,133 कैलीपर्स, 10,452 व्हीलचेयर और 3,646 ट्राइसाइकिलों का वितरण किया है।

By: suchita mishra

Published: 28 May 2019, 10:32 AM IST

अलीगढ़। नारायण सेवा संस्थान ने आगरा अलीगढ़ रोड स्थित विकास नगर में दिव्यांगों के लिए निशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर का आयोजन किया। शिविर के दौरान लगभग 40 दिव्यांगों को निशुल्क कृत्रिम अंग और कैलीपर्स मुहैया कराए गए। साथ में 5 दिव्यांगों को ऑपरेशन के लिए चयन किया गया। उनका उदयपुर में स्थित नारायण सेवा संस्थान में ऑपरेशन कराया जाएगा । संस्थान ने पिछले महीने दिल्ली और जयपुर में कृत्रिम अंग मापन शिविर भी आयोजित किया था, जिसमें अंग वितरण के लिए करीब 80 लोगों का नाप लिया गया था।

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पैरों पर खड़े होकर सक्षम बनाना चाहते हैं
नारायण सेवा संस्थान के प्रेसीडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, ‘‘अब तक हमने 99,133 कैलीपर्स, 10,452 व्हीलचेयर और 3,646 ट्राइसाइकिलों का वितरण किया है। एनजीओ जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क कृत्रिम अंग और प्रोस्थेटिक्स दे रहा है, जिनका बाजार मूल्य 70,000 रुपए के आसपास है। हम प्रत्येक ऐसे दिव्यांग शख्स तक पहुंचने का इरादा रखते हैं, जिन्हें चलने-फिरने के लिए और अपना रोजमर्रा का कामकाज करने के लिए कृत्रिम अंग की जरूरत होती है। लेकिन साथ ही हम उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और सामने आने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम बनाना चाहते हैं।

विकलांग

छह शहरों में होगा शिविरों का आयोजन
नारायण सेवा संस्थान की प्रोस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक विशेषज्ञ सुरेंदर कुमार गोयल ने कहा, “हमारे प्रोस्थेटिक और ऑर्थोटिक इंजीनियरों ने ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों की सहायता से इस शिविर में कस्टमाइज्ड कृत्रिम अंगों को दिव्यांगों के शरीर में स्थापित किया। नारायण सेवा संस्थान ने पिछले 35 वर्षों में 3.7 लाख से अधिक रोगियों का ऑपरेशन किया है। 1,13,231 लोगों को निशुल्क सहायता प्रदान करने के बाद नारायण सेवा संस्थान आने वाले समय महीने के दौरान जयपुर, अहमदाबाद, आगरा, हैदराबाद, बैंगलोर और अलीगढ़ में भी कृत्रिम अंग वितरण शिविर आयोजित करने की योजना बना रहा है। संस्थान ने अपनी स्थापना के बाद से देश भर में 500 से अधिक शिविरों का आयोजन किया है और दिव्यांग लोगों को चलने-फिरने में सक्षम बनाने में मदद की है। कृत्रिम अंगों के सहारे वे अपनी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

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