आब-ए-जमजम से आंबेडकर की मूर्ति धोने का विरोध, जानें क्या है वजह!

आब-ए-जमजम से आंबेडकर की मूर्ति धोने का विरोध, जानें क्या है वजह!

suchita mishra | Publish: Apr, 17 2018 01:49:44 PM (IST) Aligarh, Uttar Pradesh, India

पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह द्वारा आंबेडकर मूर्ति को आब-ए-जमजम से धोने से नाराज एआईएमआईएम पार्टी ने उनका पुतला फूंका।

अलीगढ़। पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह द्वारा आंबेडकर मूर्ति को आब-ए-जमजम पानी से धोने पर विवाद बढ़ गया है। इसको लेकर एआईएमआईएम पार्टी ने जमीरउल्लाह का शमशाद मार्केट पर पुतला फूंका। एआईएमआईएम पार्टी के जिलाध्यक्ष नेता ने कहा कि पूर्व विधायक ने कहा कि आब-ए-जमजम के पानी का गलत इस्तेमाल किया गया है। पूर्व विधायक को ऐसा नहीं करना चाहिए था। आब-ए-जमजम से इस्लाम की आस्था जुडी हुई है और उसका गलत तरीके से इस्तेमाल करके भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके चलते पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह का पुतला फूंका गया है। हाजी जमीरउल्लाह इस्लाम से ही ताल्लुक रखते हैं, लेकिन इस तरह की हरकत उनको नहीं करनी चाहिए थी। वे इस्लाम को मानने वाले हैं और उनको इसकी जानकारी होनी चाहिए।

एआईएमआईएम नेता ने कहा कि हाजी जमीरउल्लाह ओछी मानसिकता के साथ राजनीति कर रहे हैं। एक तरफ भाजपा मूर्तियों की राजनीति करती है तो दूसरा नेता प्रतिमा को अपवित्र बता देता है। ऐसे नेताओं ने ठेका ले रखा है। जो लोग मूर्तिबाजी की राजनीति कर रहे हैं उनको समाज से बाहर निकाल देना चाहिए। पुलता फूंक रहे नेता ने कहा कि मूर्ति गंदी हो जाती है तो कभी कपड़ा मार कर साफ नहीं किया होगा और आब-ए-जमजम पवित्र जल को मूर्ति को साफ करने में इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे नेताओं का विरोध होना चाहिए। एआईएआईएमके जिला अध्यक्ष ने कहा कि किसी को भी गलत करने नहीं दिया जाएगा। जो लोग देश की आबो हवा खराब करना चाहते हैं, उनको मुंह तोड़ जवाब देना होगा और इसके लिए एक हजार पुतले फूंकने पड़े तो भी हम रुकेंगे नहीं। आब-ए-जमजम के इस्तेमाल से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी है। राजनीति चमकाने के लिए घटिया सोच के साथ काम किया जा रहा है।

जानें क्या है आब-ए-जमजम
सऊदी अरब का एक प्रसिद्ध और प्राचीन कुआं है-जमजम। पानी का यह कुआं तीस मीटर गहरा है जिसकी पानी की सतह अधिकतम 18.5 लीटर और कम से कम 11 लीटर बताई जाती है। न कभी इसका पानी सूखा और न खराब हुआ। मक्का के इस कुएं के पानी को आब-ए-जमजम कहा जाता है। यह पवित्र धर्मस्थल काबा के पास स्थित है। जिस तरह हिंदुओं में गंगाजल को पवित्र माना जाता है, वैसे ही मुसलमानों में आब-ए-जमजम का महत्व है। सबसे बड़े आश्चर्य की बात है कि मीलों फैले रेगिस्तान में जहां सिर्फ रेत ही रेत है, वहीं यह कुआं लाखों लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करता है। मक्का और मदीना के लोग तो इसका पानी लेते ही हैं, हज के समय हर वर्ष वहां लाखों की तादाद में जाने वाले यात्रियों की जल की आवश्यकता भी यही कुआं पूरी करता है।

 

Ad Block is Banned