महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा व राष्ट्र के लिए जीवन न्योछावर किया

महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा व राष्ट्र के लिए जीवन न्योछावर किया

Arjun Richhariya | Updated: 14 Jun 2019, 10:25:49 PM (IST) alirajpur

असाड़ा राजपूत समाज भवन में महाराणा प्रताप जयंती महोत्सव का आयोजन

झाबुआ. परस्पर प्रेम, विश्वास, सामंजस्यता,रचनात्मकता के साथ भावी पीढ़ी को संस्कारित कर बहुआयामी प्रतिभा का निर्माण करना समाज के विकास और सामाजिक सुधार का उत्कृष्ट कदम होगा। हिन्दू राष्ट्र के गौरव महाराणा प्रताप को एक ही समाज से बांधा नहीं जा सकता, उनके साथ में समाज की सभी कौम ने वतन के लिए योगदान दिया है। वे अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर कर शत्रु की अधीनता को ठुकराते हुए जीवन पर्यन्त राष्ट्र के लिए लड़े। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देशहित में ही कार्य करना चाहिए। यह बात आलीराजपुर में असाड़ा राजपूत समाज की ओर से आयोजित महाराणा प्रताप जयंती महोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा इंदौर के जिलाध्यक्ष दुलेसिंह राठौर ने कही।

उन्होंने कहा कि बेटियों को राजपूताना संस्कार सिखाएं, जिससे हमारी भारतीय संस्कृति की परम्परा अक्षुण्य रहे। मृत्यु भोज में खर्च कम करते हुए दिवंगत की स्मृति में स्थायी रचनात्मक निर्माण कार्य करवाएं और सामूहिक विवाह का प्रचलन बढ़े और सक्षम लोग स्वयं भी अनुसरण करें तो समाज का गौरव बढ़े।

विशेष अतिथि राजपूत समाज रतलाम के पूर्व अध्यक्ष चरणसिंह जादव ने अपने उद्बोधन में मातृशक्तियों के स्वावलंबन की सराहना की व युवाओं को भी लक्ष्य हेतु प्रेरित करते हुए हिन्दुस्तान के नक्शे कदम पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की अपील की। अतिथि युवा अ.भा.क्ष.महासभा इंदौर के जिलाध्यक्ष श्रवणसिंह चावड़ा ने कहा कि हमारी आन-बान-शान के प्रतीक महापुरुषों को याद रखेंगे तो भावी पीढ़ी हमें याद रखेगी और स्थानीय राजपूत समाज की प्रगति प्रेरणादायी है। अतिथि राजपूत समाज जोबट के वरिष्ठ करणसिंह राठौर ने कहा कि हम ऐसे ही आयोजन के माध्यम से भी जागृत हो जाएं तो समाज कभी रुकेगा नहीं, देश ही नहीं वरन विदेश में भी आगे बढ़ेंगे। अतिथि अ.भा.क्ष.म.के प्रांतीय उपाध्यक्ष दिलीपसिंह पंवार (इंदौर) ने कहा कि महाराणा प्रताप इस्लाम विरोधी नहीं थे, क्योंकि उनके सेनापति हकीमखां सूरी थे, वे हिन्द रक्षक थे, वतन के लिए प्राण दे दिए, इसलिए सरकार महाराणा प्रताप के नाम से राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित करे। इस अवसर पर राजपूत समाज अध्यक्ष राजेशसिंह जे.वाघेला, अ.भा.क्ष.म.के जिलाध्यक्ष अशोकसिंह सोलंकी एवं रिंकेशसिंह तंवर ने भी अपने विचार रखे। समाज के पूर्व अध्यक्ष पुरेन्द्रसिंह चंदेल व राजपूत समाज दाहोद के अध्यक्ष वसंतसिंह पंवार, राजपूत समाज रतलाम के सचिव रघुवीरसिंह सांखला, कोषाध्यक्ष शैलेन्द्रसिंह देवड़ा, राजपूत समाज जोबट से उदयभानसिंह धाकरे, शैलेन्द्रसिंह राठौर, घटना-चक्र पत्रिका इंदौर के संपादक सुधीरसिंह वाघेला मंचासीन थे।

समाज के मीडिया संयोजक उमेशसिंह कछवाहा (वर्मा) ने बताया कि कार्यक्रम में मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र के सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों पुरुजीतसिंह सिसोदिया, सनतसिंह सोलंकी, सुबोधसिंह वाघेला, मनोजसिंह सोलंकी सहित सैकड़ों समाज बंधुओं, महिलाओं ने भी शिरकत की। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर शुभारंभ किया।

ईष्र्या त्याग कर संगठन की एकता को मजबूत करें
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अतिथि राजपूत किरण पत्रिका के संपादक धनसिंह राठौर (इंदौर) ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने राष्ट्र समाज के प्रति जो आदर्श स्थापित किए, उसका हमें अनुसरण करना चाहिए। विदेशी शासकों ने उनके धर्म के प्रचार के लिए हिंदू शास्त्र नष्ट करने का बीड़ा उठाया, जिसे राजपूतों ने रोका, नहीं तो संपूर्ण भारत पाकिस्तान होता। भारत में लोकतंत्र की स्थापना के लिए राजपूतों ने अपनी रिसायतों को विलय कर दिया। इसलिए राजनीति में वर्चस्व हेतु प्रभावी कदम उठाना चाहिए। समाजजन के प्रति ईष्र्या की भावना का त्याग कर संगठन की एकता को मजबूत करें।

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