मकर संक्रांति 2018.. जानिए संगम स्नान का महत्व, क्या दान करने से मिलता है मनोवांछित फल

Prasoon Pandey

Publish: Jan, 13 2018 09:13:48 PM (IST)

Allahabad, Uttar Pradesh, India
मकर संक्रांति 2018.. जानिए  संगम स्नान का महत्व, क्या दान करने से मिलता है मनोवांछित फल

जानिए संगम में संक्राति पर स्नान दान से मिलता है महास्नान का पुण्य ...

इलाहाबाद, मकर संक्रान्ति सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति देश भर में मनाया जाने वाल प्रमुख पर्व है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। उस परिवर्तन को मकर संक्रान्ति के पर्व की तरह मनाते है। मकर संक्रांति पर गंगा यमुना सरस्वती की पवित्र धारा में स्नान दान करने का विशेष महत्व माना जाता है।ज्योतिषियों के अनुसार 14-15 जनवरी के दिन ही सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है । और मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। विश्व भर में मकर संक्रान्ति को अलग तरह से मनाया जाता है।

संगम में स्नान और दान का विशेष महत्व

मकर संक्राति का पर्व मुख्य रूप से ‘दान का पर्व’ है। इलाहाबाद में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर सदियों से एक माह तक भव्य माघ मेला लगता है।14 जनवरी तक का समय खरमास का होता है। इस समय पर हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य नही किया जाता है। और मकर संक्रान्ति से सभी शुभ कामो का प्रारम्भ ओता है। संगम की रेती और धर्म आस्था की धरती पर मकर संक्रान्ति से माघ में ले कल्पवास का विधिवत प्रारम्भ हो जाता है। और माना जाता है की देवता भी प्रथ्वी पर इस समय वास करते है और कि मकर संक्रान्ति से ही अच्छे दिनों की शुरुआत होती है।संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है। गृहस्थ जीवन में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है।

संगम स्नान का मिलता है सौ गुना लाभ

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध , तर्पण आदि धार्मिक परम्पराओं का विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनः प्राप्त होता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगा स्नान एवं गंगा तट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यतः सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं। लेकिन कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है ।इसी कारण यहां पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं। सामान्यतः भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियां चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं। लेकिन मकर संक्रान्ति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है।

यह है संक्राति में स्नान का शुभ समय
मकर संक्रान्ति रविवार की रात 8 बजे से मकर संक्रांति लग जाएगी। जो सोमवार को 12 बजे तक रहेगी। मकर राशि में सूर्य का प्रवेश रविवार रात होगा। सोमवार को तुला में मंगलगुरु मकर राशि में सूर्य व शुक्र एवं धनु राशि में शनि व बुध का प्रवेश होगा।साथ ही मूल नक्षत्र ध्रुव योग वाणिज करण का दुर्लभ संयोग बनेगा। सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। देवताओं का दिन व असुरों की रात्रि शुरू होगी ऐसा माना जाता है संक्रान्ति से ही शुभ व मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे।


मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। क्योंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं। इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

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